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सुरक्षाबलों ने पिछले कुछ समय से नक्सलियों के नेटवर्क पर सीधे हमला किया है, जिससे उनके हमलों में कमी आई है. वहीं सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर नक्सली लगातार सरेंडर भी कर रहे हैं. अब बालाघाट में सरेंडर कर चुके नक्सलियों को पुलिस प्रशासन सिलाई की ट्रेनिंग दे रहा है.
सिलाई की ट्रेनिंग ले रहे नक्सली
बालाघाट में सरेंडर कर चुके नक्सलियों को अब मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है. सरेंडर नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास की दिशा में कदम उठाए गए हैं. बालाघाट पुलिस लाइन में उन्हें सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जहां वे कपड़े सिलना और पुलिस जवानों की वर्दी तैयार करना सीख रहे हैं. खास बात यह है कि जो नक्सली कभी पुलिस के खिलाफ हथियार उठाते थे. अब वही पुलिस कर्मियों की वर्दी सिलना सीख रहे हैं.
कपड़े बनाने की बारीकियां सीख रहे हैं नक्सली
बालाघाट पुलिस लाइन में बनाए गए ट्रेनिंग सेंटर में सरेंडर नक्सलियों को सिलाई और बुनियादी टेलरिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है. यहां महिला और पुरुष दोनों नक्सली कपड़े सिलने की बारीकियां सीख रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में वे शर्ट-पैंट, पुलिस वर्दी और महिलाओं के कपड़े बनाना सीख रहे हैं. ताकि भविष्य में इस हुनर के सहारे आत्मनिर्भर बन सकें.
ट्रेनिंग सेंटर में एसआई राजाराम विश्वकर्मा सरेंडर नक्सलियों को सिलाई का प्रशिक्षण दे रहे हैं. शुरुआत में भाषा और माहौल को लेकर थोड़ी दिक्कत जरूर हुई, लेकिन समय के साथ सभी के बीच बेहतर तालमेल बन गया है. अब सरेंडर नक्सली तेजी से काम सीख रहे हैं और नए जीवन की ओर बढ़ रहे हैं.
नक्सलियों के लिए खुल रहे रोजगार के रास्ते
दिलचस्प बात यह है कि जिन नक्सलियों ने कभी पुलिस को दुश्मन माना था, आज वही उनके लिए वर्दी तैयार कर रहे हैं. ट्रेनिंग के दौरान सरेंडर नक्सलियों को करीब 800 पुलिस वर्दियां सिलने का काम दिया जाएगा. इससे उन्हें हुनर भी मिल रहा है और आगे चलकर रोजगार के रास्ते भी खुल रहे हैं.
ट्रैक्टर और जेसीबी चलाना सीखने की भी जताई इच्छा
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक सरेंडर महिला नक्सलियों से उनकी अभिरुचि जानने के लिए फॉर्म भरवाया गया था. इसमें कई महिलाओं ने सिलाई, कढ़ाई और बुनाई सीखने की इच्छा जताई. इसके बाद बालाघाट पुलिस लाइन में एक ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया गया है, जहां उन्हें सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. वहीं कुछ सरेंडर नक्सलियों ने ट्रैक्टर और जेसीबी चलाना सीखने की भी इच्छा जताई है, जिसके लिए भी पुलिस प्रशासन ने व्यवस्था कर दी है.
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