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सर्दी-जुकाम एक आम समस्या है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आयुर्वेदिक उपचार शरीर को प्राकृतिक तरीके से ठीक करते हैं और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. नियमित रूप से तुलसी, गिलोय, हल्दी और शहद जैसी औषधियों का उपयोग करने से इससे बचा जा सकता है
सर्दी-जुकाम एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली समस्या है जो मौसम बदलते ही अधिकांश लोगों को प्रभावित करती है. आयुर्वेद के अनुसार, यह दोषों के असंतुलन के कारण होता है, विशेष रूप से कफ दोष के बढ़ने से. आधुनिक दवाओं के बजाय अगर प्राकृतिक और घरेलू आयुर्वेदिक उपचार अपनाए जाएं, तो सर्दी-जुकाम जल्दी और बिना किसी दुष्प्रभाव के ठीक हो सकता है.

तुलसी और अदरक दोनों ही एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर हैं. रोजाना सुबह और शाम तुलसी-अदरक की चाय पीने से नाक बंद होना, गले में खराश और सिरदर्द जैसी समस्याएं दूर होती हैं. इसे बनाने के लिए पानी में पांच से सात तुलसी की पत्तियां और आधा इंच कद्दूकस किया हुआ अदरक उबालें. चाहें तो थोड़ा शहद डालकर पी लें. यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और जुकाम जल्दी ठीक करता है.

हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है जो शरीर की सूजन को कम करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर पीने से सर्दी-जुकाम में बहुत आराम मिलता है. यह गले की खराश को शांत करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है. यह उपचार बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सुरक्षित और असरदार है.

भाप लेना सर्दी-जुकाम में तुरंत राहत देने वाला उपाय है. एक बर्तन में गर्म पानी लें और उसमें कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की डालें. अब सिर पर तौलिया रखकर धीरे-धीरे भाप लें. यह उपाय नाक की जकड़न और गले की सूजन को कम करता है. दिन में दो बार भाप लेने से सांस लेने में आसानी होती है और बंद नाक खुल जाती है. यह उपाय आयुर्वेद में कफ कम करने के लिए सबसे प्रभावी माना गया है.

गिलोय को ‘अमृता’ कहा गया है क्योंकि यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है. सर्दी-जुकाम में गिलोय का रस या काढ़ा पीना बेहद लाभकारी है. एक गिलास पानी में गिलोय की डंडी उबालकर उसमें थोड़ा तुलसी और अदरक मिलाएं. इसे छानकर दिन में एक या दो बार पिएं. यह शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है और जुकाम को जल्दी ठीक करता है

शहद और दालचीनी दोनों का संयोजन सर्दी-जुकाम में बहुत उपयोगी होता है. एक चम्मच शहद में एक चुटकी दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें. यह गले की खराश को शांत करता है और खांसी को कम करता है. साथ ही यह शरीर को गर्म रखता है और रोगाणुओं को खत्म करता है. यह उपाय बच्चों के लिए भी सुरक्षित और स्वादिष्ट होता है.

त्रिकटु चूर्ण तीन औषधियों – काली मिर्च, पिपली और सौंठ से बनाया जाता है. यह कफ दोष को संतुलित करता है और सर्दी-जुकाम में तुरंत असर दिखाता है. आधा चम्मच त्रिकटु चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार लें. इससे नाक बंद होना, सिर भारी लगना और खांसी जैसी समस्याएं दूर होती हैं. यह शरीर की पाचन क्रिया को भी सुधारता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है.
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