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अल्मोड़ा: क्या आप जानते हैं कि सर्दियों में तुलसी हमारे शरीर को किन छुपे हुए खतरों से बचाती है? यदि नहीं, तो यह लेख तुलसी की उन वैज्ञानिक और पारंपरिक खूबियों का खुलासा करता है, जो ठंड के मौसम में इम्यूनिटी, सांस, पाचन और त्वचा को अद्भुत सुरक्षा प्रदान करती हैं.
सर्दियों में तापमान गिरते ही संक्रमण बढ़ जाते हैं. ऐसे मौसम में तुलसी भारतीय परिवारों में प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है. आयुर्वेद में इसे ऐसा पौधा माना गया है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है.

तुलसी में मौजूद विटामिन A, C और एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को सर्दियों में मजबूत बनाए रखते हैं. शोध इसका औषधीय महत्व भी साबित कर चुके हैं, जो इसे केवल धार्मिक प्रतीक से कहीं अधिक बनाता है.

सर्दियों में खांसी, जुकाम और गले की खराश आम समस्याएं हैं. तुलसी की चाय या काढ़ा इन लक्षणों में राहत देने में प्रभावी माना जाता है. इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले की सूजन कम करने में मदद करते हैं.
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शहरी प्रदूषण बढ़ने के साथ तुलसी के एंटी-माइक्रोबियल गुण फेफड़ों के लिए उपयोगी साबित होते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सेवन से सर्दियों में सांस संबंधी समस्याओं का जोखिम कम किया जा सकता है.

सर्दियों में पाचन धीमा हो जाता है, लेकिन तुलसी गैस, अपच और पेट की सूजन को कम करने में मदद कर सकती है. इसे वैज्ञानिक और पारंपरिक दोनों ही दृष्टिकोणों से लाभकारी माना गया है.

आधुनिक जीवनशैली में तनाव आम समस्या बन चुका है. तुलसी के एडैप्टोजेनिक गुण शरीर को तनाव से लड़ने में मदद करते हैं. इसलिए सर्दियों में तुलसी की गर्म चाय मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है.

कुल मिलाकर, तुलसी सर्दियों में स्वास्थ्य संरक्षण का एक प्रभावी और प्राकृतिक साधन है. इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक दोनों पहलू इसे स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं.