सतना में नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) की एमडी डॉ. शोभिनी राजन के नेतृत्व में बनी चार सदस्यीय टीम दो दिनों की जांच पूरी कर वापस लौट गई। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, टीम ने ब्लड बैंक को मशीनरी उपलब्ध कराने वाली मुंबई की सूर्या चैरिटेबल ट्रस्ट मे
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जानकारों ने बताया कि नाको अब यह तय कर रही है कि रीजेंट खत्म होने पर एचआईवी टेस्ट किट का उपयोग नहीं होगा। इसके लिए एलाइजा मैथेड को अपनाया जाएगा। हालांकि, सतना जैसे मझोले शहर में ऐसे सीनियर लैब तकनीशियन कम हैं, जो एलाइजा टेस्ट में दक्ष हों। टीम ने ब्लड बैंक में किसी भी डोनर का रक्त लेने से पहले गंभीर स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए।
आईसीटीसी और ब्लड बैंक के बीच समन्वय की कमी
जांच टीम ने पाया कि ब्लड बैंक और इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) के बीच समन्वय की कमी है। आईसीटीसी एचआईवी पीड़ितों का लेखा-जोखा रखती है, लेकिन ब्लड बैंक में जांच के दौरान किसी डोनर के रक्त में एचआईवी पाए जाने की जानकारी आईसीटीसी को काफी देर बाद भेजी जाती है। टीम ने रोजाना रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए।
बिरला अस्पताल ब्लड बैंक में मिला 50 दिन पुराना स्टॉक
केन्द्रीय जांच दल को बिरला अस्पताल के निजी ब्लड बैंक में विभिन्न ग्रुपों का 50 दिन पुराना रक्त स्टॉक मिला। नियम अनुसार 42 दिन से अधिक पुराना स्टॉक नहीं होना चाहिए। टीम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कड़ी कार्यवाही की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि खून के सौदागरों की नकेल कसनी जरूरी है, नहीं तो संक्रमित रक्त पहुंचने की आशंका बनी रहेगी।