Narmada River: नर्मदा नदी उल्टी दिशा में क्यों बहती है? बहुत कम लोगों को पता है ये कथा, जानें

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Narmada River story: नर्मदा को भगवान शिव की पुत्री माना गया है. नर्मदा को “रेवा” नाम से भी पूजा जाता है और इसे गंगा से भी ज्यादा पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. कहते हैं कि…

Khargone News: भारत में नदियों को देवी स्वरूप माना जाता है. यहां हर नदी का अपना इतिहास है. लोगों की आस्थाएं जुड़ी हैं, लेकिन नर्मदा नदी इन सबमें बेहद खास है. यह न केवल मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी कहलाती है, बल्कि देश की एकमात्र ऐसी नदी है, जिसकी परिक्रमा की जाती है. साथ ही यह देश की इकलौती नदी भी है, जो उल्टी दिशा में बहती है, यानी जहां देश की ज्यादातर नदियां पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं, वहीं नर्मदा पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में जाती है.

धर्म शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार, नर्मदा को भगवान शिव की पुत्री माना गया है. कहते हैं कि नर्मदा की उत्पत्ति शिव के पसीने से हुई है. नर्मदा को “रेवा” नाम से भी पूजा जाता है. कहते हैं कि गंगा में स्नान से जो पुण्य मिलता है, वह नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है. मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति नर्मदा परिक्रमा पूरी करता है, उसे जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिलती है. यही वजह है कि हर साल देश विदेश के लाखों श्रद्धालु करीब 3500 किलो मीटर पैदल चलकर नर्मदा की परिक्रमा पूरी करते है.

नर्मदा के उल्टे बहने का वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार, नर्मदा नदी का उल्टा बहना एक प्राकृतिक घटना है. यह नदी विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के बीच बहती है. इस क्षेत्र में भूमि का ढलान पश्चिम की ओर है, इसलिए नदी का प्रवाह भी उसी दिशा में होता है. भूगर्भीय रूप से इसे रिफ्ट वैली कहा जाता है. यही कारण है कि नर्मदा नदी का जल पश्चिम की ओर बहते हुए अरब सागर में जाकर मिलता है.

नर्मदा के उल्टे बहने की पौराणिक कहानी
लोककथा के अनुसार, नर्मदा नदी राजा मेखल की सुंदर पुत्री थीं. उनके विवाह के लिए यह शर्त रखी गई थी कि जो राजकुमार दुर्लभ गुलबकावली के फूल को लेकर आएगा, उसी से नर्मदा का विवाह होगा. राजकुमार सोनभद्र इस शर्त को पूरा किया. दोनों के बीच विवाह तय हुआ, लेकिन नर्मदा उनसे मिलने से पहले अपनी दासी जुहिला के माध्यम से प्रेम संदेश भेजती हैं. जुहिला, जिसने नर्मदा के वस्त्राभूषण पहन लिए थे, जब सोनभद्र के पास पहुंची तो राजकुमार ने उसे ही नर्मदा समझ लिया.

इसलिए नर्मदा बहती उल्टी
जुहिला भी इस भ्रम में डूब गई और सोनभद्र का प्रेम स्वीकार कर लिया. जब नर्मदा को यह सब पता चला तो उनका दिल टूट गया. अपमान और दुख से भरी नर्मदा ने तय किया कि अब वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखेंगी. हालांकि, सोनभद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ पर स्वाभिमान में नर्मदा ने कभी मुड़कर नहीं देखा. तभी से नर्मदा उल्टी दिशा में बहने लगी.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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