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नादिर बताते है कि उनके इस प्रयास से उनके 10 दोस्त भी प्रेरित हुए है और अब वे भी ब्लड डोनेट करने में साथ देते है. जब भी किसी को ब्लड की जरूरत होती है और नादिर को फोन आता है तो उनके दोस्त भी अस्पताल पहुंच जाते है. नादिर को उनके इस काम के लिए अस्पताल प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने सम्मानित भी किया है. हाल ही में उन्होंने खंडवा में एक बीमार बच्ची को अपनी खुद की राशि खर्च कर ब्लड डोनेट किया. जिससे उसकी जान बच गई.
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के दाउदपुरा क्षेत्र में रहने वाले नादिर अली एक मजदूर है जो ब्लड डोनेट करने के मामले में हमेशा आगे रहते है. 43 साल की उम्र में अब तक उन्होंने 25 बार ब्लड डोनेट किया है. उनका कहना है कि वे खुद तो ब्लड डोनेट करते ही है. साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी इस कार्य के लिए प्रेरित करते है. उनके प्रयासों से उनके दोस्त भी प्रेरित हुए है और अब उनकी एक 20 लोगों की टीम बन चुकी है जो हमेशा ब्लड डोनेट करने के लिए तैयार रहती है. नादिर अली को उनके इस सराहनीय काम के लिए जिला प्रशासन और अस्पताल प्रशासन ने सम्मानित भी किया है. पिछले 15 सालों से वे इस नेक काम को कर रहे है.
नादिर अली ने लोकल 18 की टीम को बताया कि एक बार उन्होंने एक बच्ची को ब्लड की कमी के कारण मरते हुए देखा. उसी समय उन्होंने निर्णय लिया कि वे ब्लड डोनेट करेंगे. पहली बार ब्लड डोनेट करते समय उन्हें डर लगा. लेकिन जिस व्यक्ति को उन्होंने ब्लड दिया. वह बेहद गरीब था और उसे सख्त जरूरत थी. इसके बाद उन्होंने पैसे लेने से इंकार कर दिया और तभी से लोगों की मदद करने का संकल्प लिया। अब तक वे 28 बार ब्लड डोनेट कर चुके है और जब तक सांस चलेगी. वे यह कार्य करते रहेंगे.
नादिर बताते है कि उनके इस प्रयास से उनके 10 दोस्त भी प्रेरित हुए है और अब वे भी ब्लड डोनेट करने में साथ देते है. जब भी किसी को ब्लड की जरूरत होती है और नादिर को फोन आता है तो उनके दोस्त भी अस्पताल पहुंच जाते है. नादिर को उनके इस काम के लिए अस्पताल प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने सम्मानित भी किया है. हाल ही में उन्होंने खंडवा में एक बीमार बच्ची को अपनी खुद की राशि खर्च कर ब्लड डोनेट किया. जिससे उसकी जान बच गई.
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