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अगर यह साबित हो गया कि चलती Tesla पर गिरा ऑब्जेक्ट वास्तव में एक Meteorite था, तो यह मानव इतिहास की पहली दर्ज घटना होगी. एक तरफ Tesla का ऑटोपायलट मोड हादसे को झेल गया, वहीं दूसरी तरफ यह घटना दिखाती है कि हमारी टेक्नोलॉजी कितनी एडवांस हो जाए, अंतरिक्ष का एक छोटा सा टुकड़ा भी उसे चुनौती दे सकता है.
Tesla पर हुआ अद्भुत वार: पिघल गया कांच, बढ़ा साइंटिफिक सस्पेंस
घटना के बाद मेलविल-स्मिथ ने तुरंत म्यूजियम को सूचना दी. जांच में पता चला कि विंडस्क्रीन का हिस्सा वाकई गर्म होकर पिघला था. म्यूजियम के मिनरलॉजिस्ट कीरन मीनि ने कहा कि जो ऑब्जेक्ट टकराया, उसमें बहुत ज्यादा हीट थी. उन्होंने बताया कि Meteorites आमतौर पर ठंडे रहते हैं क्योंकि वायुमंडल में घर्षण से सिर्फ उनकी बाहरी परत जलती है. लेकिन अगर कोई ऑब्जेक्ट बहुत तेज स्पीड से जमीन पर गिरता है, तो टकराने के वक्त उसकी Kinetic Energy हीट में बदल सकती है और वो पिघलन पैदा कर सकती है.
Space Dust से भरी हमारी धरती, पर इतना सटीक हिट दुर्लभ
वैज्ञानिकों के मुताबिक हर साल करीब 5200 टन मटेरियल अंतरिक्ष से धरती पर गिरता है. ज्यादातर तो बेहद सूक्ष्म Dust होती है, जो छतों और नालियों में जमा हो जाती है. बड़े Meteorite के गिरने की घटनाएं बहुत कम होती हैं और किसी को टकराना तो लगभग नामुमकिन माना जाता है.
क्या ये Meteorite था या कुछ और?
म्यूजियम अब उस कांच की जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उसमें किसी Space Rock के कण फंसे हैं. अगर यह वाकई Meteorite निकला, तो म्यूजियम उस इलाके में जाकर उसका बचा हुआ हिस्सा खोजेगा. हालांकि मीनि ने यह भी कहा कि यह Space Junk या किसी जहाज से गिरी चीज भी हो सकती है. फिलहाल जांच जारी है, लेकिन पहली नजर में Meteorite का ही अनुमान लगाया जा रहा है.
दीपक वर्मा न्यूज18 हिंदी (डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े दीपक की जर्नलिज्म जर्नी की शुरुआत प्रिंट मीडिया से हुई थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म…और पढ़ें
दीपक वर्मा न्यूज18 हिंदी (डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े दीपक की जर्नलिज्म जर्नी की शुरुआत प्रिंट मीडिया से हुई थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म… और पढ़ें
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