मेरे पिताजी को भूलने की बीमारी है, मेरे दादा जी को भी था, क्या मुझे भी होगा, आपका भी यह सवाल है तो अभी डॉक्टर से जान लें

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Family Dementia History: संभव अभी 25 साल का है लेकिन अभी से उसे एक चिंता खाई जा रही है. दरअसल, उनके पिता को भूलने की बीमारी डिमेंशिया थी. पता चला कि उनके दादाजी को भी यही बीमारी थी. इसलिए उसे चिंता हो रही है कि यह बीमारी कहीं उसे भी न लग जाए. ऐसे में क्या उसे भी यह बीमारी होगी. आइए इसके बारे में डॉक्टर से जानते हैं.

डिमेंशिया पर डॉ. तुषार तायल की सलाह.

Family Dementia History: भूलने की बीमारी जीवन की गुणवत्ता को खराब कर देती है. यह बीमारी ऐसी नहीं है कि कुछ चीजें याद नहीं आती और बाद में फिर याद आ गई. यह बीमारी ऐसी है कि आपके दिमाग से कुछ चीजों का स्मृति लोप हो जाता है. इसे डिमेंशिया कहा जाता है. संभव इसी बीमारी के कारण अभी से चिंतित है. हालांकि उसे अभी यह बीमारी नहीं है लेकिन उन्हें लगता है कि कहीं उसे यह बीमारी हो न जाए. दरअसल उनके पिताजी को भी यह बीमारी थी और उनके दादाजी को भी यह बीमारी थी. इसलिए उन्होंने पूछा है कि क्या उन्हें भी इस बीमारी का खतरा है. इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने सी के बिड़ला अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल से बात की.

बच्चों को डिमेंशिया का कितना चांस

डॉ. तुषार तायल ने बताया कि 25 साल के संभव को भी डिमेंशिया होने का खतरा हो सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह पिता से आया हुआ जीन कितना प्रभावी है. इसलिए ऐसे लोगों में डिमेंशिया या भूलने की बीमारी का जोखिम बहुत ज्यादा रहता है. हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि जिन लोगों के पिता और दादा को डिमेंशिया है, उनके पोते या बेटे को भी यह बीमारी हो जाए. ऐसे में सबको यह बीमारी हो जाए जरूरी नहीं. हां ऐसे लोगों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है. अब सवाल है कि ऐसे लोगों में किनको इस बीमारी का खतरा ज्यादा है. आइए इसके बारे में जानते हैं.

किन लोगों को ज्यादा खतरा

डॉ. तुषार तायल ने बताया कि जिन लोगों के परिवार में किसी को डिमेंशिया होता है, उसके बच्चों में इसकी आशंका तब और बढ़ जाती है जब उन्हें क्रोनिक बीमारी हो. मतलब यदि उन्हें फैटी लिवर डिजीज, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर,किडनी डिजीज, अस्थमा, क्रोह्न डिजीज, कोलाइटिस, हार्ट डिजीज जैसी बीमारियां हो. इन बीमारियों में ब्लड वैसल्स को नुकसान पहुंचता है. इन सबके कारण ब्रेन के ब्लड वैसल्स भी प्रभावित होते हैं जिससे ब्रेन को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. अगर ब्रेन में ऑक्सीजन की कमी होने लगे तो डिमेंशिया या किसी भी तरह के दिमाग से संबंधित बीमारियों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.

क्या करें कि डिमेंशिया न हो

डॉ. तुषार तायल ने बताया कि डिमेंशिया से बचने का तरीका है कि आप दिमागी गतिविधियों को बढाइए. यानी दिमाग को जितना एक्टिव रखेंगे जितना दिमागी एक्सरसाइज करेंगे उतना फायदा होगा. इसके लिए सुडोकी,स्क्रॉल वाला गेम, पजल आदि खेलते रहिए. इसके अलावा नई-नई चीजें सीखते रहिए. जैसे गणित का वो फॉर्मूला जो पहले आपको नहीं आता था, कोई नई भाषा, नई कहानी, कविता आदि पढ़ते रहें. नए-नए शब्द के बारे में पता कीजिए. वहीं उल्टी गिनती कीजिए. इन सबके अलावा सामाजिक जीवन जिएं. अपने परिवार, दोस्तों और सोसाइटी से घुलते-मिलते रहें. रात को सुकून भरी नींद लें. जो चीज खुद आपने सीखी है उसे दूसरे को सिखाएं. डिमेंशिया से बचने के लिए रोज एक्सरसाइज करें. योगा और मेडिटेशन बहुत फायदेमंद है.

खान-पान क्या होनी चाहिए

खान-पान के लिए आप हेल्दी डाइट लीजिए. डॉ. तुषार तायल कहते हैं कि अनहेल्दी डाइट खासकर सिगरेट और शराब को हाथ न लगाएं. इससे डिमेंशिया का खतरा और बढ़ जाएगा. इसके लिए सीजनल फ्रूट, हरी सब्जियां खाएं. कलरफुल फल और सब्जियों पर फोकस करें.

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Lakshmi Narayan

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मेरे पिताजी को भूलने की बीमारी है, मेरे दादा जी को भी था, क्या मुझे भी होगा

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