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छपरा की बेरोजगार महिला अब आत्मनिर्भर बन रही हैं. महिला खुद से कमाई का जरिया बना रही है. साथ ही दूसरी बेरोजगार महिलाओं को भी रोजगार का अनोखा आइडिया दे रही हैं. आज हम बात कर रहे हैं.
नगरा प्रखंड के अफौर गांव निवासी राधिका देवी की, जिन्होंने बेरोजगारी की वजह से काफी परेशान देखी. पति एक छोटा किसान है. कमाई का कोई जरिया नहीं था. इसी दौरान उन्होंने जीविका से जुड़कर काम करना शुरू किया. जीविका में काम करते हुए मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया. अब खुद से मशरूम उत्पादन करके बेच कर घर चलाने में मदद करती है. साथ ही बेरोजगार महिला को भी मशरूम उत्पादन के लिए जागरूक कर प्रशिक्षण देती हैं.
राधिका देवी से प्रशिक्षण लेकर मशरूम उत्पादन करके मशरूम से कई चीजे बनाकर बेच रही हैं. मशरूम बेच रही है, जिससे बेरोजगार महिलाओं को काफी मदद मिल रही है. राधिका देवी के पास कम लागत में मशरूम उत्पादन करने का काफी बेहतर आइडिया है. इनके द्वारा जुगाड़ विधि से मशरूम उत्पादन किया जाता है. जिसमें खर्च भी कम आता है और कमाई ज्यादा होती है. लकड़ी बंबू से मचान बनाकर मशरूम उत्पादन सिस्टम लगता है. जिसमें खर्च कम आता है. और कमाई अच्छी होती है. राधिका देवी मशरूम से अचार, बिस्कुट, पाउडर सहित कई चीज बनाने का तरीका बहुत अच्छे से जानती हैं. मशरूम का स्पॉन भी खुद से तैयार करती है. जैविक विधि से मशरूम उत्पादन करती है. जिसको खाने से कोई नुकसान भी नहीं होता है.
मशरूम की बिक्री कहां होती है
राधिका देवी भले ही शहर से दूर गांव में रहती है. लेकिन इनका काम पहचान जिले के सभी प्रखंड में है. यही वजह है कि मशरूम बेचने के लिए किसी मार्केट में भेजना नहीं पड़ता है, और ना ही जाना पड़ता है. इनके पास डॉक्टर, शिक्षक, वकील, ब्लॉक कर्मचारी सहित तमाम लोग मशरूम खरीदने के लिए पहुंच जाते हैं. यहां तक की मशरूम के लिए एक-दो दिन पहले ही एडवांस पैसा देकर लोग बुकिंग भी करते हैं. घर पर ही मशरूम बिक जाता है. किसी बाजार में नहीं जाना पड़ता है.
लोकल 18 से राधिका देवी ने बताया कि जीविका और कृषि विभाग की ओर से मशरूम उत्पादन करने का प्रशिक्षण लिया हूं. प्रशिक्षण लेने के बाद मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत ₹10 हजार रुपया लोन लेकर मशरूम उत्पादन करने का सेटअप लगाया. मैं इस बिजनेस को और बड़े स्तर पर करना चाहता हूं. लेकिन मुझे समय पर जिले में स्पॉन नहीं मिलता है. जिसके वजह से मुझे मुजफ्फरपुर जाकर स्पॉन लेना पड़ता है. उन्होंने बताया कि मैं खुद से भी ओयस्टर मशरूम का स्पॉन तैयार करती हूं. अब मैं दूसरे जीविका दीदी को भी जाकर मोटिवेट करती हूं. और समय-समय पर प्रशिक्षण देने का भी काम करती हूं. यही वजह है कि जिले के सभी प्रखंड की महिला अधिकारी और किसान काफी अच्छे तरीके से मुझे जानते हैं.
कई महिलाओं को सिखाया रोजगार
2018 से मैं मशरूम उत्पादन कर रहा हूं. बहुत से जीविका दीदी से कहती हूं कि कम जगह से ही मशरूम उत्पादन करिए, कमाई के साथ शुद्ध मशरूम खाने को भी मिलेगा. मैं खुद से बैग तैयार कर जीविका दीदी को 5-10 की संख्या में बैग देता हूं. जब मशरूम उत्पादन होने लगता है तो जीविका दीदी मशरूम उत्पादन के लिए खुद उत्साहित हो जाती है. उसके बाद अपने घर पर मशरूम उत्पादन करके कमाई भी करती है. कम लागत में अधिक कमाई करने का आइडिया मैं बताता हूं. हमसे 18 से 20 की संख्या में महिला जुड़कर मशरूम उत्पादन कर रही हैं. जिससे अपने घर को चलाने में मदद करती हैं. कई बेरोजगार महिला को मैंने मशरूम उत्पादन करना सिखाया. जिससे उन्हें रोजगार मिला है.
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