इस देश में ‘मिस्टर शर्मा’ बन सकेंगे ‘मिस्टर वर्मा’, पति अपनाएगा पत्नी का सरनेम

Agency:एजेंसियां

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दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक फैसला दिया है. वहां अब पति चाहें तो पत्नी का सरनेम अपना सकेंगे. कोर्ट ने इसे औपनिवेशिक परंपरा और लैंगिक भेदभाव मानते हुए कानून पलटा.

इस देश में 'मिस्टर शर्मा' बन सकेंगे 'मिस्टर वर्मा'! पति अपनाएगा पत्नी का सरनेमसरनेम की जंजीर टूटी, कोर्ट बोला- पति भी बदल सकते हैं अपना नाम (File Photo : AP)
प्रिटोरिया: दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची अदालत ने इतिहास बदल देने वाला फैसला सुनाया है. अब वहां पति अपनी पत्नी का सरनेम अपना सकेंगे. यह अधिकार अब तक सिर्फ महिलाओं तक सीमित था, यानी शादी के बाद पत्नी पति का उपनाम अपना सकती थी, लेकिन पति के लिए यह रास्ता बंद था. कोर्ट ने इसे लैंगिक भेदभाव मानते हुए कानून ही पलट दिया. संवैधानिक अदालत ने माना कि यह कानून असल में औपनिवेशिक दौर की देन था. यूरोपीय उपनिवेशवाद और ईसाई मिशनरियों के आने के बाद ही यह परंपरा बनी कि महिला शादी के बाद पति का उपनाम अपनाए. जबकि कई अफ्रीकी संस्कृतियों में शादी के बाद भी महिला अपना नाम बरकरार रखती थी और बच्चे अक्सर मां के क्लैन नेम से पहचाने जाते थे. कोर्ट ने कहा कि यह पितृसत्तात्मक सोच आज भी समाज पर हावी है और अब इसे खत्म करने का वक्त आ गया है.

सरनेम के लिए दो कपल्स कीलंबी लड़ाई

यह लड़ाई दो कपल्स ने मिलकर लड़ी. Henry van der Merwe अपनी पत्नी Jana Jordaan का सरनेम अपनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया. वहीं Andreas Nicolas Bornman अपने नाम के साथ पत्नी का सरनेम Donnelly जोड़कर Bornman-Donnelly बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें भी कानून ने मना कर दिया. इन कपल्स ने निचली अदालत में चुनौती दी और जीत गए. बाद में इस आदेश को पुख्ता करने के लिए अदालत पहुंचे. अब सुप्रीम स्तर पर भी उनकी जीत हो गई.

संसद को करना होगा बदलाव

इस फैसले के बाद संसद को Births and Deaths Registration Act में संशोधन करना होगा. तभी नया अधिकार पूरी तरह लागू होगा. कोर्ट ने साफ किया कि दक्षिण अफ्रीका ने जेंडर इक्विटी में काफी प्रगति की है, लेकिन अभी भी ऐसे कानून और परंपराएं बाकी हैं जो पुराने और भेदभावपूर्ण हैं.

सरकार ने भी दिया समर्थन

इस केस में दिलचस्प बात यह रही कि सरकार के मंत्री भी इस कानून के खिलाफ खड़े हुए. गृह मंत्री Leon Schreiber और न्याय मंत्री Mamoloko Kubayi ने अदालत में माना कि यह कानून पुराना हो चुका है और इसे बदलना चाहिए. वहीं Free State Society of Advocates नाम की कानूनी संस्था भी कपल्स के समर्थन में उतरी और कहा कि पुरुषों को यह अधिकार न देना असमानता और स्टीरियोटाइप्स को बढ़ावा देना है.

भारत में क्या होता है?

भारत में भी शादी के बाद अक्सर महिलाएं पति का उपनाम अपनाती हैं. हालांकि कई आधुनिक परिवारों में महिलाएं अपना नाम बरकरार रखती हैं या हाइफ़नेट कर लेती हैं. लेकिन पुरुषों द्वारा पत्नी का नाम अपनाने की मिसालें बेहद कम हैं. दक्षिण अफ्रीका का यह फैसला पूरी दुनिया में चर्चा का कारण बनेगा और भारत में भी इस पर बहस छिड़ सकती है. आखिर क्यों सिर्फ पत्नी पर नाम बदलने का दबाव हो और पति को यह विकल्प न मिले?

Deepak Verma

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He…और पढ़ें

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