MP का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का घर: NTCA ने मंजूरी दी, 8 बाड़े तैयार होंगे, सॉफ्ट रिलीज बोमा में करेंगे शिकार – Sagar News

मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही), चीतों के पुनर्वास के लिए तैयार है। चीता परियोजना के तहत, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने टाइगर रिजर्व को 5.20 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। इस बजट का

.

प्रारंभ में, मुहली रेंज में क्वारंटाइन बोमा बनाने की तैयारी चल रही है, जिसमें विस्थापन, बाड़ लगाने और घास के मैदान के प्रबंधन जैसे कार्य शामिल हैं। क्वारंटाइन बोमा में आने वाले चीतों की निगरानी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले साल तक चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया जा सकता है।

टाइगर रिजर्व में चीतों के प्राकृतिक आवास के प्रमाण पहले भी मिले थे, जिसमें खुले घास के मैदान हैं। चीतों के लिए पर्याप्त शिकार, जैसे कि चिंकारा, चीतल और काले हिरण भी उपलब्ध हैं। इस टाइगर रिजर्व में चीता, बाघ और तेंदुआ एक साथ रहेंगे, जो इसे देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व बना देगा।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में शीघ्र ही चीते भी शिफ्ट किए जाएंगे।

घास के मैदान और आहार होने से संघर्ष का खतरा कम टाइगर रिजर्व में काफी पहले चीतों के प्राकृतिक वास के प्रमाण मिले थे। यहां घास के खुले मैदान हैं। नौरादेही से गांवों के विस्थापन के साथ मैदान और फैल रहे हैं। यहां चीते लंबी दौड़ के साथ शिकार कर सकते हैं। टाइगर रिजर्व का कोर एरिया 1414 वर्ग किमी है। बफर एरिया 925.120 वर्ग किमी का है। जबकि टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किमी में फैला है। चीतों को रखने के लिए मैदान चिंहित भी किए जा रहे हैं। यह क्षेत्रफल के लिहाज से प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। टाइगर रिजर्व में चीतों को शिकार के लिए चिंकारा, चीतल व काले हिरण की पर्याप्त संख्या है। यही वजह है कि यहां बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। चीतों की यहां बाघ, तेंदुओं से टकराव जैसी स्थिति बनने की आशंका नहीं है। निरीक्षण के बाद से तैयारियां शुरू हुईं दरअसल, भारत सरकार के चीता प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून के वैज्ञानिकों और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के डीआईजी डॉ. वीबी माथुर ने 1 से 3 मई तक वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिवर्ज का निरीक्षण किया था। वे टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एए अंसारी के साथ जंगल में पहुंचे। उन्होंने टाइगर रिजर्व का पूरा क्षेत्रफल देखा। सभी रेंजों में पहुंचकर वहां की व्यवस्थाएं देखी। 2 दिन तक चले निरीक्षण के बाद टीम ने टाइगर रिजर्व की मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज को चीतों की बसाहट के लिए अनुकूल माना। चीता प्रोजेक्ट के अफसरों के निरीक्षण के बाद टाइगर रिजर्व में चीतों की बसाहट के लिए पत्राचार शुरू हुआ। जिसके बाद से टाइगर रिजर्व में चीतों की शिफ्टिंग की तैयारियां के निर्देश जारी किए गए थे।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अभी बाघ और तेंदुआ हैं।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अभी बाघ और तेंदुआ हैं।

अब जानिए क्या होते हैं क्वारंटाइन और सॉफ्ट रिलीज बोमा बोमा अफ्रीकी तकनीक है। जिसका उपयोग वन्यजीवों को पकड़ने और स्थानांतरित करने में किया जाता है। क्वारंटाइन बोमा का उपयोग चीता पुनर्वास परियोजना में किया जा रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी 4 क्वारंटाइन और 4 सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाए जाना है। इसमें क्वारंटाइन बोमा (बाड़े) में नीमीबिया से आने वाले चीतों को छोड़ा जाएगा। यहां चीतों के स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी। सीसीटीवी कैमरों से उनकी हर हरकत पर नजर रखी जाएगी। निगरानी के लिए टाइगर रिवर्ज की टीम के साथ ही डॉक्टर और विशेषज्ञों को तैनात किया जाएगा। इस दौरान उन्हें नए परिवेश और वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में मदद मिलती है। सॉफ्ट रिलीज बोमा में शिकार करेंगे चीता क्वारंटाइन अवधि पूरी करने के बाद चीतों को सॉफ्ट रिलीज बोमा में स्थानांतरित किया जाएगा। यह होमा क्वारंटाइन बोमा से काफी बड़े होते हैं। इसमें चीता प्राकृतिक आवास महसूस करते हैं। वह विचरण करते हैं। शिकार के लिए चीतल, नीलगाय जैसे जावनर बोमा में उपलब्ध कराए जाते हैं। जहां चीता अपना शिकार स्वयं करते हैं। साथ ही इस बाड़े में वह जंगल में पूरी तरह खुले छोड़े जाने के लिए तैयार होते हैं।

टाइगर रिजर्व के पहुंच मार्गों को भी बनाया जा रहा है।

टाइगर रिजर्व के पहुंच मार्गों को भी बनाया जा रहा है।

एकसाथ रहेंगे चीता, बाघ और तेंदुआ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की शिफ्टिंग होने के बाद यह देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व होगा, जहां पर एक साथ चीता, बाघ और तेंदुआ रहेगा। इससे पहले ऐसा कहीं नहीं हुआ है। यह प्रयोग भी साबित होगा कि यह तीनों जानवर एकसाथ एक जंगल में रह सकते हैं। क्योंकि अब तक देश के किसी भी टाइगर रिजर्व में एक साथ टाइगर, तेंदुआ और चीतों की बसाहट नहीं हुई है। वर्तमान में टाइगर रिजर्व में मांसाहारी जानवरों में टाइगर और तेंदुओं के साथ भेडिया और सियार भी मौजूद हैं। कूनो से पहले नौरादेही में होना थी चीतों की शिफ्टिंग चीतों की बसाहट की पहल शुरू होने पर भारतीय वन्यजीव संस्थान(डब्ल्यूआईआई) देहरादून ने देश में चीतों की बसाहट के लिए सबसे पहले सागर के नौरादेही अभ्यारण्य को चिंहित किया था। 15 साल पहले वर्ष 2010 में यहां सर्वे किया गया था। जिसमें नौरादेही की मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज को चीता की बसाहट के अनुकूल माना गया था। इन तीनों रेंजों का क्षेत्रफल करीब 600 वर्गकिमी है। लेकिन परिस्थितियों के अनुरूप सबसे पहले चीतों की बसाहट कूनो में की गई थी। लेकिन अब फिर टाइगर रिजर्व में चीतों की बसाहट की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

2023 में अभ्यारण्य से टाइगर रिजर्व बना नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य को 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। इसका नाम बदलकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिवर्ज कर दिया गया है। यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। जिसका क्षेत्रफल 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। दरअसल, नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। तब इसकार क्षेत्रफल 1197 वर्ग किमी था। लेकिन टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद इसका क्षेत्रफल बढ़कर 2339 वर्ग किमी हो गया। इसमें 1414 वर्ग किमी कोर एरिया और 925.12 वर्ग किमी बफर एरिया शामिल है।

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *