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Bhopal News: मध्य प्रदेश में पिछले 10 साल में 22,438 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं. सबसे बड़ा कारण छात्रों की कम संख्या, स्कूलों का विलय और ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन हैं. देवास के सनबानी कराड गांव में स्कूल बंद होने का विरोध ग्रामीण और बच्चों द्वारा किया जा रहा है. इस बीच सवाल यह है कि क्या ग्रामीण और गरीब बच्चों को सच में अच्छी शिक्षा मिल पा रही है?
शिवकांत आचार्य,भोपाल
Bhopal News: सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिख रही है. लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 साल में मध्य प्रदेश में 22,438 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं. स्कूल बंद होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जैसे छात्रों की कम संख्या, स्कूलों का आपस में विलय और गांवों से शहरों की ओर लोगों का पलायन. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर स्कूल बंद होते रहेंगे, तो गरीब और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी?
देवास जिले के सनबानी कराड गांव में भी एक सरकारी स्कूल को बंद करने का आदेश दिया गया है. इसका ग्रामीण और बच्चे विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक, अगर स्कूल बंद हो गया, तो छोटे बच्चों को 5 से 10 किलोमीटर दूर कैसे भेजेंगे? गरीब परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई कैसे जारी रख पाएंगे? ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूल बंद नहीं होने चाहिए.
समिति के सदस्यों का क्या कहना है
‘स्कूल बचाओ संघर्ष समिति’ के सदस्यों का कहना है कि लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार स्कूल बंद करने के मामले में उत्तर प्रदेश पहले और मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है. उनका आरोप है कि सरकार लंबे समय से स्कूलों पर ध्यान नहीं दे रही है. प्रदेश में कई स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं, 387 स्कूलों के पास खुद की बिल्डिंग नहीं है, कई जगह शिक्षक नहीं हैं और जरूरी सुविधाओं की कमी है. ग्वालियर जिले में 28 स्कूलों को निजी हाथों में दे दिया गया है. कुछ जगह छात्रों को स्कॉलरशिप टाइम पर नहीं मिलती और शिक्षकों को वेतन में भी परेशानी होती है. समिति का कहना है कि सरकार स्कूल बंद करने की बजाय उनकी गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे.
शिक्षा मंत्री क्या बोले
वहीं, प्रदेश के शिक्षा मंत्री का कहना है कि जहां बच्चे हैं, वहां स्कूल बंद नहीं किए जाएंगे. उनका कहना है कि बिना छात्रों के खाली भवन में स्कूल चलाना सही नहीं है. सरकार का दावा है कि ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य की ओर है और पिछले दो साल में नामांकन संख्या में कुछ बढ़ोतरी हुई है. सरकारी स्कूलों में सुविधाएं और बुनियादी ढांचा बेहतर किया जा रहा है, जिससे बच्चों का रुझान बढ़ रहा है. एक ओर सरकार व्यवस्था को बेहतर बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और सामाजिक संगठन इसे शिक्षा पर बड़ा झटका मान रहे हैं. इन सबके बीच सवाल यही है कि क्या ग्रामीण और गरीब बच्चों को सच में अच्छी शिक्षा मिल पा रही है या स्कूलों के बंद होने से उनके सपनों पर असर पड़ रहा है?
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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