नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा पर घने जंगलों के बीच स्थित विराध कुंड आज भी रामायण काल की एक अद्भुत गाथा को जीवंत करता है। जमुनिहाई गांव से लगभग 3 किलोमीटर दूर यह रहस्यमयी कुंड न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनसुलझे रहस्यों के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है।
रामनवमी के पावन अवसर पर विराध कुंड न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है, बल्कि इतिहास, पौराणिकता और रहस्य का ऐसा संगम प्रस्तुत करता है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है।
‘विराध कुंड’ केवल एक कुंड नहीं, बल्कि रामायण काल की जीवंत स्मृति, आस्था की गहराई और प्रकृति के अनसुलझे रहस्यों का अद्भुत प्रतीक है। यह स्थल हमें न सिर्फ अपनी संस्कृति से जोड़ता है, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश भी देता है।
रामायण से जुड़ी पौराणिक कथा
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान दंडकारण्य वन से गुजर रहे थे, तभी राक्षस विराध ने उन पर हमला कर दिया और माता सीता का हरण कर लिया। भगवान राम और लक्ष्मण के बाणों का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि उसे ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था।
तब प्रभु श्रीराम ने अपनी रणनीति बदलते हुए विराध के दोनों हाथ काट दिए और अंततः उसे भूमि में गाड़कर उसका वध किया। मरते समय विराध ने अपना पूर्वजन्म बताते हुए कहा कि वह गंधर्व तुम्बुरु था, जिसे श्राप के कारण राक्षस योनि मिली थी। प्रभु श्रीराम के हाथों उसका उद्धार हुआ। यही स्थान आज ‘विराध कुंड’ के नाम से प्रसिद्ध है।
रहस्य से भरा कुंड – आज तक नहीं मिली थाह
इस कुंड की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी अथाह गहराई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुंड में फेंकी गई वस्तु की आवाज 5–7 मिनट बाद सुनाई देती है। आज तक इसकी गहराई मापने में प्रशासन भी सफल नहीं हो पाया है। कई बार प्रयासों के बावजूद इसका तल रहस्य ही बना हुआ है।
खतरा भी और संरक्षण की मांग भी
जहां एक ओर यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है, वहीं दूसरी ओर यह वन्यजीवों और इंसानों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां गिरने वाले जानवरों या वस्तुओं का कोई पता नहीं चलता। यह रहस्य इसे और भी अलौकिक बनाता है, जिससे लोग इसे ‘स्वर्ग मार्ग’ से भी जोड़ते हैं।
पूर्व में एक प्रेमी युगल की घटना ने भी इस जगह को और रहस्यमयी बना दिया। अब स्थानीय लोग इस स्थल के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि इसे सुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
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