पुराने समय की बात है, एक गांव में गुरु और शिष्य खिलौने बनाकर जीविका चलाते थे। गुरु की उम्र अधिक थी, उनका अनुभव भी ज्यादा था, जबकि शिष्य युवा था और नए-नए विचारों से भरा था। दोनों मिलकर खिलौने बनाते और बेचते थे। गुरु के मार्गदर्शन में शिष्य धीरे-धीरे बेहतरीन खिलौने बनाने लगा। उसके खिलौनों की बिक्री इतनी अच्छी होने लगी कि वे गुरु के खिलौनों से अधिक कीमत पर बिकने लगे। गुरु रोज शिष्य को यही कहते थे कि तुम्हारे खिलौने अच्छे हैं, लेकिन उनमें सफाई और निखार की आवश्यकता है। शुरू में तो शिष्य ने गुरु की बातों को गंभीरता से लिया, लेकिन कुछ दिनों बाद उसे यह सलाह बुरी लगने लगी। वह सोचने लगा कि मेरे खिलौने तो गुरु के खिलौनों से अच्छी कीमत पर बिक रहे हैं। शायद उन्हें जलन हो रही है, इसीलिए मुझे ही लगातार सुधार की सलाह देते हैं। धीरे-धीरे शिष्य का घमंड बढ़ने लगा। एक दिन, उसने गुस्से में गुरु से कहा कि गुरुजी, मेरे खिलौने ज्यादा पैसे कमा रहे हैं, फिर भी आप मुझे ही सुधार करने की सलाह देते हैं। मुझे लगता है कि आपको अपनी कला पर ध्यान देना चाहिए। गुरु ने शांति से शिष्य की बात सुनी और मुस्कुराते हुए कहा कि बेटा, जब मैं तुम्हारी उम्र का था, मेरे खिलौने भी मेरे गुरु के खिलौनों से बेहतर बिकते थे। उस समय मैं भी यही सोचता था कि गुरु क्यों लगातार सुधार की बातें करते हैं, लेकिन एक दिन गुरु ने मुझसे सलाह देना बंद कर दी और मैं अपनी कला में और अधिक निखार नहीं ला सका। मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे साथ भी ऐसा हो। गुरु की बातों में नाराजगी नहीं थी, लेकिन उनमें गहरी सीख थी। शिष्य को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने गुरु से क्षमा मांगी और फिर पूरी लगन से अपनी कला सुधारने में जुट गया। धीरे-धीरे शिष्य ने न केवल बहुत अच्छे खिलौने बनाना सीख लिया, बल्कि उसने अपनी शालीनता और अनुशासन के कारण गांव में सम्मान भी पाया। कथा की सीख यदि आप अपने काम में पारंगत बनना चाहते हैं, तो गुरु की सलाह का सम्मान करें। सफलता मिलने पर घमंड न करें, क्योंकि गुरु का मार्गदर्शन ही आपकी कला को शिखर तक पहुंचा सकता है। जब किसी काम में सफलता मिले, तो घमंड करना आसान हो जाता है, लेकिन महान लोग जानते हैं कि हर उपलब्धि सीखने का अवसर है। अपनी उपलब्धियों को गुरु, अनुभव और परिश्रम का फल समझें। सफल होने के बाद भी विनम्र रहें, यही महान लोगों की निशानी है। चाहे आप कितने भी योग्य हो जाएं, गुरु के अनुभव और मार्गदर्शन से सीखना हमेशा उपयोगी रहता है। घमंड करने से आप अपने गुरु की मूल्यवान सलाह खो सकते हैं। घमंड का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह आपको सीखने और बढ़ने से रोकता है। आत्मनिरीक्षण करें और याद रखें कि हर विशेषज्ञ कभी शिष्य था। किसी भी काम में हमेशा सुधार की गुंजाइश होती है। छोटी-छोटी सलाह को गंभीरता से लें और उन्हें अपने कौशल में निखार के रूप में अपनाएं। अपने काम की दूसरों के काम से तुलना करने की आदत से बचें। इससे ईर्ष्या, घमंड और गलतफहमियां बढ़ती हैं। अपने आप पर ध्यान दें और सुधार की दिशा में मेहनत करते रहें। आलोचना को व्यक्तिगत हमला समझने के बजाय सीखने का अवसर समझें। गुरु आपके सुधार के लिए कुछ कहते हैं, न कि आपकी आलोचना करने के लिए। दूसरों की आलोचना को सुझाव समझें और काम में सुधार करें। किसी भी कला में महारत पाने के लिए समय और अनुशासन की आवश्यकता होती है। छोटे-छोटे सुधार ही व्यक्ति को महान बना सकते हैं। सफलता एक ठहराव नहीं है, बल्कि सीखने और सुधारने की प्रक्रिया है। हमेशा अपने काम में नवीनता और गुणवत्ता लाने की कोशिश करते रहें। केवल परिणाम देखकर संतुष्ट न हों। अपने प्रयासों और मेहनत पर गौर करें और अपनी कला को लगातार सुधारते रहें। .