Kaitha Ki Chutney: विंध्य क्षेत्र में गर्मियों के मौसम में खानपान की परंपराएं सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि सेहत से भी गहराई से जुड़ी होती हैं. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है कैथा की चटनी, जो इन दिनों लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. तेज गर्मी में पेट को ठंडा रखने और भूख बढ़ाने के लिए यह चटनी बेहद कारगर मानी जाती है.
सीधी की गृहणी सीमा रजक ने बताया, कैथा को कई जगहों पर हाथी सेब भी कहा जाता है, देखने में बेल जैसा होता है, लेकिन स्वाद के मामले में यह उससे बिल्कुल अलग है. इसका बाहरी छिलका काफी कठोर होता है, जबकि अंदर का गूदा नरम और बेहद खट्टा होता है. इसका स्वाद इमली से भी ज्यादा खट्टा होता है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है और खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है.
चटनी के लिए सामग्री
सीमा ने बताया कि कैथा की चटनी तैयार करने के लिए कैथा का गूदा, लहसुन, हरी मिर्च, हरा धनिया और नमक का उपयोग किया जाता है. इन सभी सामग्री को सिलबट्टे या मिक्सी में पीसकर चटनी तैयार की जाती है. खास बात यह है कि इस चटनी को हमेशा पतला बनाया जाता है, क्योंकि कुछ समय बाद यह अपने-आप गाढ़ी हो जाती है.
पानी डालने से बढ़ेगा उपयोग
यदि चटनी को एक-दो दिन में उपयोग करना हो तो इसमें पानी मिलाया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक स्टोर करने के लिए पानी नहीं डालना चाहिए. कैथा की चटनी को दाल-चावल, रोटी-सब्जी, पराठा, भजिया और मंगोड़ी जैसे व्यंजनों के साथ खाया जाता है, जिससे भोजन का स्वाद और भी बढ़ जाता है.
कब्ज से मिलेगी राहत
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के मुताबिक, कैथा सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर और रफेज पाए जाते हैं, जो शरीर में जमा कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में मदद करते हैं. यह मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाकर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज व बवासीर जैसी समस्याओं में भी राहत देता है.
डायबिटीज के मरीजों के लिए कैथा का गूदा विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा यह लिवर और किडनी के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इतना ही नहीं, कैथा की जड़ का पाउडर अनिद्रा की समस्या को दूर करने और अच्छी नींद लाने में भी उपयोगी बताया गया है.
.