खरगोन जिले में इस वर्ष 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गर्मी की मूंग की बुवाई की गई है। हालांकि, सरकारी खरीदी को लेकर किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण पिछले साल की तुलना में बुवाई का रकबा घट गया है। जिन किसानों के पास अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था थी, उन्होंने मूंग की फसल लगाई है, जो अब बढ़वार पर है। पिछले साल 33 हजार हेक्टेयर में मूंग बोई गई थी, जबकि इस वर्ष यह रकबा घटकर 26 हजार हेक्टेयर रह गया है, जो लगभग 20% की कमी दर्शाता है। ‘खरीदी को लेकर अभी तक कोई सूचना नहीं’
किसान भावसिंह चौहान और आत्माराम सेठाना ने बताया कि प्रदेश सरकार समर्थन मूल्य पर गर्मी की मूंग खरीदती है। फसल को बोए हुए लगभग एक महीना हो चुका है, लेकिन खरीदी को लेकर अभी तक कोई सूचना जारी नहीं की गई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 से 8768 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। सहायक संचालक कृषि प्रकाश ठाकुर ने पुष्टि की कि मूंग खरीदी के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं हुए हैं। किसानों के अनुसार, बारिश की मूंग की तुलना में गर्मी की मूंग की फसल में बीमारियां कम आती हैं, जिससे उत्पादन भी अधिक होता है। जहां बारिश में प्रति हेक्टेयर 8 क्विंटल मूंग की उपज होती है, वहीं गर्मी में यह 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच जाती है। मूंग की पत्तियों पर रस चूसक कीटों का हमला भी कम होता है, जिसे किसान स्थानीय कृषि विभाग के मार्गदर्शन से नियंत्रित कर लेते हैं। .