मासिक शिवरात्रि व्रत से मिट जाएंगे पाप, जनवरी में ये है संकट दूर करने का दिन

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Masik Shivratri Upay: मासिक शिवरात्रि के दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इस दिन को और खास बना रहा है. इस दिन ध्रुव योग और मूल नक्षत्र बन रहा है. ध्रुव योग सुबह से लेकर रात 9:06 मिनट के करीब तक रहेगा.

उज्जैन. हिंदू पंचांग में हर तिथि और हर वार का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है. इन्हीं में से एक अत्यंत पुण्यदायी पर्व है मासिक शिवरात्रि, जो प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. यह पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना को समर्पित होता है. इस दिन श्रद्धालु भोलेनाथ का अभिषेक कर व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से शिव कृपा प्राप्त होती है और जीवन की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. विवाहित महिलाओं के दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है जबकि अविवाहितों के लिए शीघ्र विवाह के शुभ योग बनते हैं. ऐसे में भक्तों के मन में यह जानने की उत्सुकता बनी होगी कि माघ माह की मासिक शिवरात्रि कब मनाई जाएगी. आइए जानते हैं उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज से इस बार की सही तिथि और महत्व.

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी दिन शुक्रवार को रात में 10 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 17 जनवरी की देर रात 12 बजकर 03 मिनट पर हो रहा है. अगर हम निशिता मुहूर्त के आधार पर माघ की ​मासिक शिवरात्रि की बात करें, तो यह 16 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी.

शुभ योग में मनाई जाएगी शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि के दिन दुर्लभ संयोग का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन को और खास बनाता है. इस दिन ध्रुव योग और मूल नक्षत्र बन रहा है. ध्रुव योग सुबह से लेकर रात 09 बजकर 06 मिनट के लगभग तक रहेगा. उसके बाद व्याघात योग बनेगा. शिवरात्रि पर मूल नक्षत्र है, जो प्रातःकाल से पूर्ण रात्रि तक है. चंद्रमा धनु राशि में और सूर्य मकर राशि में रहेंगे.

मासिक शिवरात्रि व्रत के लाभ
मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए. जो भी भक्त इस व्रत को पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य और संतान आदि प्राप्त करता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

जरूर करें इन मंत्रों का जाप
– ऊं त्रिदलं त्रिगुणाकारम त्रिनेत्रम च त्रिधायुतम्। त्रिजन्म पाप संहारम एक बिल्व शिवार्पणम.
– ऊं शिवाय नमः – ऊं सर्वात्मने नमः – ऊं त्रिनेत्राय नमः – ऊं हराय नमः – ऊं इन्द्रमुखाय नमः

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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