1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले यूनियन बजट 2026-27 में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बजट से पहले इंडस्ट्री बॉडीज जैसे ICEA और MAIT ने प्री-बजट मेमोरेंडम में कस्टम ड्यूटी रेशनलाइजेशन की मांग की है, ताकि मेक इन इंडिया को मजबूत किया जा सके. यह बजट आयात-निर्यात शुल्क में संतुलन लाकर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा, जिससे उपभोक्ताओं के लिए गैजेट्स की कीमतें प्रभावित होंगी. आइए देखें कि मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्टवॉच पर कस्टम ड्यूटी के संभावित बदलावों का क्या असर पड़ सकता है.
मोबाइल फोन सेक्टर में सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं. ICEA ने मोबाइल के की कंपोनेंट्स जैसे माइक्रोफोन, रिसीवर, स्पीकर और PCBA पर BCD को 15% से घटाकर 10% करने की मांग की है. साथ ही, फिनिश्ड हियरेबल्स और वेयरेबल्स पर ड्यूटी 20% से 15% करने का सुझाव दिया गया है.
अगर ये बदलाव होते हैं, तो आयातित कंपोनेंट्स की लागत कम होगी, जिससे मोबाइल फोन की कीमतें 5-8% तक सस्ती हो सकती हैं. मेक इन इंडिया के तहत PLI स्कीम (जो मार्च 2026 में खत्म हो रही है) को एक्सटेंड करने की उम्मीद है, जिससे लोकल प्रोडक्शन बढ़ेगा. इससे निर्यात बढ़ेगा और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा से कीमतें स्थिर या कम रहेंगी. भारत पहले से ही ग्लोबल मोबाइल हब बन चुका है, और ये बदलाव इसे और मजबूत करेंगे.
लैपटॉप पर क्या असर?
लैपटॉप के लिए स्थिति मिश्रित है. MAIT ने कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले असेंबली और कनेक्टर्स जैसे क्रिटिकल सब-असेंबली पर BCD को 10% से 5% करने की मांग की है. अगर ये कटौती होती है, तो नॉन-टच लैपटॉप और बेसिक मॉडल्स की मैन्युफैक्चरिंग लागत कम होगी, जिससे कीमतें सस्ती हो सकती हैं.
हालांकि, इंटरएक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले (IFPD) जैसे हाई-एंड कंपोनेंट्स पर ड्यूटी पहले से बढ़ी हुई है, और अगर कोई बढ़ोतरी हुई तो टचस्क्रीन लैपटॉप महंगे हो सकते हैं.
बजट में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने पर फोकस है, जहां रॉ मटेरियल पर ज्यादा ड्यूटी से लोकल प्रोडक्शन महंगा होता है. मेक इन इंडिया को प्रमोट करने से लैपटॉप असेंबलिंग बढ़ेगी, निर्यात शुल्क में छूट मिल सकती है, और लॉन्ग टर्म में कीमतें कम होंगी.
स्मार्टवॉच और वेयरेबल्स पर ICEA ने फिनिश्ड प्रोडक्ट्स की ड्यूटी 20% से 15% और मैकेनिकल पार्ट्स की 15% से 10% करने की मांग की है.
अगर ये लागू होते हैं, तो आयातित स्मार्टवॉच सस्ती होंगी, जबकि लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिलेगा. PLI स्कीम के विस्तार से कंपोनेंट्स जैसे बैटरी और PCBA लोकल बनेगे, जिससे निर्यात बढ़ेगा और कीमतें अप्रत्यक्ष रूप से कम होंगी. कुल मिलाकर, बजट में कस्टम ड्यूटी रेशनलाइजेशन से आयात शुल्क कम होगा, लेकिन फोकस मेक इन इंडिया पर है. इससे इंपोर्टेड फिनिश्ड गैजेट्स पर ड्यूटी बरकरार रह सकती है, जबकि कंपोनेंट्स सस्ते होंगे.
- मोबाइल फोन – काफी संभावना सस्ते होने की.
- लैपटॉप (नॉन-टच) – सस्ते या स्थिर.
- टच/हाई-एंड लैपटॉप – स्थिर या थोड़े महंगे.
- स्मार्टवॉच – सस्ती होने की अच्छी उम्मीद.
ये बदलाव भारत को $500 बिलियन इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने में मदद करेंगे, ग्राहकों को राहत देंगे और आत्मनिर्भरता बढ़ाएंगे.
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