MIT मुजफ्फरपुर से HPCL तक का सफर! सुरभि को मिला 17.5 लाख का पैकेज, हार चुकी थी हिम्मत

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Success Story: MIT कॉलेज मुजफ्फरपुर की सुरभि सिंह का चयन HPCL में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर के पद पर हुआ है. उनको 17.5 लाख सालाना पैकेज मिलेगा. जिससे कॉलेज और परिवार में खुशी की लहर है. सुरभि बताती हैं कि उनके जीवन का सबसे बुरा दौर तब आया जब 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद JEE MENS के लिए कड़ी मेहनत की थी. उन्होंने सोचा था कि इस बार कोई अच्छा NIT कॉलेज पक्का मिल जाएगा, लेकिन उस लायक रैंक नहीं मिला. इसके बाद वे काफी डिमोटिवेट हो गईं.

मुजफ्फरपुर के MIT कॉलेज की छात्रा सुरभि सिंह का चयन हिंदुस्तान पेट्रोल कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर के पद पर हुआ है. उन्हें सालाना 17.5 लाख का पैकेज मिलेगा. 15 दिसंबर को पुणे में सुरभि ट्रेनिंग के लिए जाएगी. इस खबर से महाविद्यालय में खुशी की लहर है. प्राचार्य डॉ. मिथलेश झा ने सुरभि को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की. ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट विभाग के प्रभारी दीपक कुमार चौधरी ने कहा कि सुरभि की यह सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है और उन्हें इस उपलब्धि से सीख लेनी चाहिए.

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सुरभि के पिता शैलेन्द्र कुमार पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर हैं. उनकी मां रंजना कुमारी गृहणी हैं. सुरभि अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. वे पटना की रहने वाली हैं. सुरभि ने 10वीं तक की पढ़ाई जहानाबाद के DAV पब्लिक स्कूल से की, फिर 12वीं की पढ़ाई के लिए पटना के एक प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लिया. 12वीं के बाद उन्होंने JEE मेंस की परीक्षा पास कर मुजफ्फरपुर के MIT कॉलेज में 2020 से 2024 के सत्र के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया. कॉलेज के दौरान उन्हें नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में 4 लाख के पैकेज पर प्लेसमेंट मिली, लेकिन उन्होंने इसे छोड़कर GATE की तैयारी शुरू की. पहले प्रयास में ही GATE पास करने के बावजूद एडमिशन नहीं लिया. दूसरी बार GATE क्वालीफाई कर IIT रुड़की में एडमिशन के लिए योग्य हो गईं लेकिन फिर भी एडमिशन न लेकर जॉब की तैयारी करती रहीं. एक साल की मेहनत के बाद सुरभि हिंदुस्तान पेट्रोल कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर के पद पर चयनित हुईं. 

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सुरभि बताती हैं कि उनके जीवन का सबसे बुरा दौर तब आया जब 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद JEE MENS के लिए कड़ी मेहनत की थी. उन्होंने सोचा था कि इस बार कोई अच्छा NIT कॉलेज पक्का मिल जाएगा, लेकिन उस लायक रैंक नहीं मिला. इसके बाद वे काफी डिमोटिवेट हो गईं. सुरभि बताती हैं कि जब भी वह डिमोटिवेट होती थीं, तो उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान होता था. मां हर चीज को दोस्त की तरह समझाती थीं और सुरभि भी दोस्त की तरह उन्हें हर बात साझा करती थीं. सुरभि बताती हैं कि उन्हें बचपन से साइंस में काफी रुचि रही और वे हर चीज को साइंस से जोड़कर देखती थीं. इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आने की प्रेरणा भी उन्हें अपने पापा से मिली. सुरभि कहती हैं कि उन्होंने यह सफलता ऑनलाइन स्रोतों और सेल्फ स्टडी की बदौलत हासिल की है. 

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सुरभि बताती है कि बचपन से लक्ष्य हमेशा स्पष्ट था और परिवार का समर्थन भी हमेशा मिलता रहा. हर बुरे परिस्थिति में भी परिवार हमारे साथ खड़ा रहता था. पिता जी हमेशा कहते थे कि सपना बड़ा रखो और ईमानदारी से मेहनत करो, सफलता एक दिन जरूर मिलेगी. सुरभि कहती है कि मैकेनिकल इंजीनियर का नाम सुनते ही लोगों को लड़के का ख्याल आता है, लेकिन मैंने इसे चुना और क्लास में टॉपर बनी रही. मैंने इस सोच को तोड़ कर अपने लक्ष्य को हासिल किया. एक लड़की होने के नाते जीवन में कई चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन मजबूत लक्ष्य और दृढ़संकल्प के सामने वह कमजोर साबित हो जाती हैं. 

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सुरभि अन्य छात्रों को संदेश देती हैं कि सबसे पहले अपना लक्ष्य स्पष्ट रखें और उसके लिए ईमानदारी से मेहनत करें, सफलता अवश्य मिलेगी. आज के समय में पढ़ाई में पैसा बाधा नहीं है. अगर आप सच में कुछ करना चाहते हैं, तो कई विकल्प उपलब्ध हैं. आज ऑनलाइन सब कुछ उपलब्ध है, जिससे घर बैठे आसानी से तैयारी की जा सकती है. सुरभि इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजन को देती हैं.

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