खंडवा. मध्य प्रदेश का खंडवा शहर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. इसी शहर के इंदौर रोड पर स्थित करीब 125 साल पुराना काल भैरव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. माना जाता है कि यहां काल भैरव बाबा स्वयंभू रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस मंदिर को चमत्कारी माना जाता है. खास बात यह है कि इस मंदिर की सेवा एक ही परिवार की चौथी पीढ़ी कर रही है. मंदिर के पीछे एक पुराना तालाब बना हुआ है. बताया जाता है कि जब इस तालाब की खुदाई की जा रही थी, तब वहां से कई प्राचीन मूर्तियां मिली थीं. बाद में इन मूर्तियों की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर मंदिर में स्थापित किया गया. आज यहां काल भैरव बाबा के साथ अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी विराजमान हैं.
लोकल 18 से बातचीत में मंदिर के पुजारी मगू पुरी गोस्वामी उर्फ मगू महाराज बताते हैं कि यह मंदिर बहुत प्राचीन है और इसका इतिहास खरदूषण राजा के समय से जुड़ा माना जाता है. उस समय यहां चारों ओर घना जंगल हुआ करता था. राजस्थान, गुजरात, इंदौर और अन्य क्षेत्रों से आने वाले बंजारे व्यापारी जब अपने सामान के साथ इस इलाके से गुजरते थे, तब उन्हें पूजा-अर्चना के लिए मंदिर की जरूरत महसूस हुई. कहा जाता है कि उन्हीं बंजारों को काल भैरव की मूर्ति कहीं मिली, जिसे उन्होंने यहां स्थापित कर मंदिर की शुरुआत की.
जंगल के बीच था यह मंदिर
पुजारी के अनुसार, कई साल पहले जिला अस्पताल से लेकर इस इलाके तक घना जंगल हुआ करता था. उस समय यह मूर्ति खुले स्थान पर थी, बाद में मंदिर बनाकर इसे सुरक्षित किया गया. धीरे-धीरे यहां पूजा-पाठ शुरू हुआ और मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र बन गया.
बाबा के चमत्कार की मान्यता
काल भैरव मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता भी है. श्रद्धालु जब अपनी मनोकामना लेकर बाबा के सामने प्रार्थना करते हैं, तो अगर काल भैरव बाबा की प्रतिमा पांच बार दाईं ओर घूम जाए, तो माना जाता है कि उनकी मनोकामना पूरी होगी. अगर ऐसा नहीं होता, तो लोग मानते हैं कि उनकी इच्छा पूरी होने में अभी समय लगेगा. इसी वजह से इस मंदिर को चमत्कारी माना जाता है.
चौथी पीढ़ी कर रही सेवा
मगू महाराज बताते हैं कि इस मंदिर की सेवा उनके परिवार की चौथी पीढ़ी कर रही है. उनसे पहले उनके पिता रुकुडू पुरी सेवा करते थे. उनके पहले उनके ससुर बुद्ध भारती और उनसे पहले उनके गुरु महाराज यहां पूजा-पाठ करते थे. आज भी उनके पुराने शिष्य और भक्त मंदिर में दर्शन करने आते हैं.
मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
खंडवा निवासी सुनील जैन ने कहा कि यह शहर प्राचीन काल में खांडवा वन के नाम से जाना जाता था. इस मंदिर में काल भैरव बाबा के साथ नागदेवता, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नाहर सिंह बाबा और धार सिंह बाबा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.
भैरव अष्टमी पर लगता आस्था का मेला
मंदिर में हर साल भैरव अष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस दिन यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं. दूर-दूर से लोग बाबा के दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. खंडवा का यह प्राचीन काल भैरव मंदिर आज भी आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम बना हुआ है, जहां हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ बाबा के दर्शन के लिए उमड़ती है.
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