कौन-कौन से पक्षी, कितने आते हैं? एमपी में पहली बार बनेगा प्रवासी पक्षी रिकॉर्ड

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Mp News : यूरोप रसिया साइबेरिया जैसे देश से हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर के पक्षी पहुंचते हैं लेकिन उनकी कितनी प्रजातियां होती हैं, कितने पक्षी आते हैं., इसकी कोई जानकारी नहीं होती है. ऐसे में मध्य प्रदेश पहली बार प्रवासी पक्षियों का रिकॉर्ड बनाने के लिए एशिया जल पक्षी गणना की जा रही है.

सागर : बुंदेलखंड के खूबसूरत नौरादेही टाइगर रिजर्व के अंदर मौजूद तालाबों में विंटर सीजन व्यतीत करने करीब 25 प्रजातियों के पक्षी आते हैं. जिनमें यूरोप हिमालय रसिया साइबेरिया जैसे देश से हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर के पक्षी पहुंचते हैं लेकिन उनकी कितनी प्रजातियां होती हैं कितने पक्षी आते हैं. इसकी कोई जानकारी नहीं होती है ऐसे में मध्य प्रदेश पहली बार प्रवासी पक्षियों का रिकॉर्ड बनाने के लिए एशिया जल पक्षी गणना की जा रही है जिसको लेकर तैयारी पूरी हो गई है.

गणना करने वाली स्टाफ को भी ऑनलाइन ऑफलाइन ट्रेनिंग दी जा चुकी है. प्रदेश भारतीय टाइगर रिजर्व में 7 जनवरी से दो दिवसीय गणना शुरू हो रही है. खास बात यह है कि अगर आप भी इस गणना का हिस्सा बनना चाहते हैं तो वालंटियर बनने के लिए अपने संबंधित वन मंडल के अधिकारी से बात कर सकते हैं.

कई तरह की बत्तख 
वीरांगना रानी दुर्गावती ( नौरादेही) टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर ए ए अंसारी बताते हैं कि एशियन वाटर वर्ड काउंटिंग पहली बार मध्यप्रदेश में होने जा रहा है. यह सभी जलाशयों में होगा. जहां पर माइग्रेटरी बर्ड्स आते हैं यह बहुत अच्छी पहल है हम अभी तक नहीं जान पाते हैं कि कौन से जलाशय में कौन सी प्रजातियां आती हैं. जैसे अगर हम नौरादेही की बात करें तो यहां जो बड़े जलाशय हैं, जमरासी बरपानी जगतराई तालाब यहां पर कई तरह की बत्तख आती हैं. पिनटेल कॉमन, मल्लार्ड जैसे कई तरह की बत्तख आती हैं.

जिनकी गणना और रिकॉर्ड रखना बहुत जरूरी है. टाइगर रिजर्व में इसकी तिथि 7 और 8 जनवरी है. गणना में वॉलिंटियर्स को भी इंवॉल्व करेंगे ताकि यह गणना सफलतापूर्वक पूरी हो सके. नौरादेही टाइगर रिजर्व में अभी आठ जलाशय चिन्हित किए हैं. जहां पर संभावना है कि प्रवासी पक्षी आते हैं. सर्दियों में भोजन के लिए उन्हीं को सेलेक्ट किए हैं और प्रत्येक जगह हमारे यहां जो स्टाफ है उनको लगाएंगे साथ ही वॉलिंटियर्स करेंगे.

ठंडे प्रदेशों से पक्षी आते हैं साइबेरिया, रसिया इन सब देशों से आते हैं. यहां पर पूरा विंटर व्यतीत करने के बाद चले जाते हैं. बालचर भी हमारे यहां आते हैं इसी सीजन में आते हैं.

ये है प्रक्रिया
गणना करने के लिए वॉलिंटियर और स्टाफ के लिए मोबाइल में एक एप्लीकेशन डाउनलोड कराया जाएगा उनके लिए कैमरा और दूरबीन भी दिया जाएगा. जिसके माध्यम से वह जिन तालाब के पास रहेंगे. वहां पर जितने भी प्रकार के पक्षी हैं. उनकी अलग-अलग फोटो लेकर उसमें अपलोड करेंगे साथ ही यह भी संख्या दर्ज करेंगे कि वहां पर लगभग कितने पक्षी है सर्वे कार्य पूरा होने के 24 घंटे बाद गणना का रिजल्ट भी सामने आ जाएगा जिसमें यह पता चलेगा की सर्दियों के मौसम में हमारे यहां कितने देशों के कौन से पक्षी आते हैं.

इसके बाद आने वाली सालों में जब यह करना होगी तो उसमें यहां का वातावरण इन पक्षियों को कितना पसंद आया पक्षियों की प्रजातियां कितनी बड़ी या कितनी कम हुई और ऐसा किस वजह से हुआ यह सब पता चलेगा. वही प्रदेश के सामान्य वन मंडलों में आने वाले तालाबों में यह गणना 3 जनवरी और 4 जनवरी को की जाएगी. जहां पर प्रवासी पक्षियों के आने की संभावना रहती है.

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