India Inflation Forecast: ईरान-इजरायल के बीच चल रहे बम-गोलों की भभक भारत तक भी पहुंच सकती है. महंगाई के मोर्चे पर हाल ही में आई आईसीआईसीआई बैंक की रिपोर्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में आ रही तेजी की वजह से वित्त वर्ष 2027 में देश की खुदरा महंगाई दर 4.5 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है. जिससे रोजमर्रा की चीजों और सर्विसेज के दाम बढ़ सकते है. आइए जानते हैं, इस रिपोर्ट के विषय में विस्तार से…
क्या कहती है रिपोर्ट?
महंगाई को लेकर बैंक ने अपने पहले के 3.9 प्रतिशत के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) अनुमान में बदलाव किया है. इसकी बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं. तेल की कीमतों में इजाफा आने से बाकी सेक्टरों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, अब महंगाई के ट्रेंड को देखते हुए अनुमान को फिर से आंका गया है.
हालांकि, रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 में भारत में महंगाई काबू में रहनी की बात भी कही गई है. इससे पहले CPI 2.1 फीसदी रहने की बात कही गई थी. वहीं, नई सीरीज में इसमें बदलाव किया गया है.
नई सीरीज में बदला महंगाई का गणित
महंगाई मापने के तरीके में बदलाव के बाद अब उपभोक्ता बास्केट भी बदल गई है. नई सीरीज में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा घटकर 36.8 प्रतिशत कर दिया गया है. जो पहले के मुकाबले करीब 9.1 फीसदी कम है. इसके उलट पेट्रोल, डीजल और LPG का वेटेज बढ़ाया गया है. जिससे ईंधन की कीमतों का असर अब ज्यादा साफ तौर पर दिखेगा.
बैंक के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से CPI पर सीधा 40-45 बेसिस प्वाइंट्स और कुल मिलाकर 50-60 बेसिस प्वाइंट्स तक असर पड़ सकता है. यानी अब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव पहले से ज्यादा तेजी से महंगाई पर पड़ेगा.
भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान
महंगाई को लेकर आरबीआई ने भी अपने अनुमान में बदलाव किया हैं. फरवरी की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI महंगाई के आंकड़ों में बदलाव किया गया है.
नई अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में महंगाई करीब 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है.
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