13 मिनट पहले
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सवाल- मेरी उम्र 33 साल है। मैं झारखंड की रहने वाली हूं। चार साल पहले सिंगापुर में मेरी अरेंज मैरिज हुई। लड़का मेरे पापा के दोस्त का बेटा था। पापा ने बस ये देखा कि लड़के की जॉब अच्छी है, परिवार समृद्ध है और शादी कर दी। शादी के बाद चार महीने गुजर गए और मेरे हसबैंड ने मुझे हाथ भी नहीं लगाया। मुझे ये बहुत अजीब लगता था, लेकिन किसी से कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई। शादी के छह महीने गुजर जाने के बाद मुझे पता चला कि मेरे हसबैंड गे हैं और ये शादी उन्होंने अपने पैरेंट्स के दबाव में की है। उनके घरवालों को भी उनकी सेक्शुएलिटी के बारे में कुछ भी पता नहीं था। शादी को चार साल हो गए हैं और हम दोनों भाई-बहन की तरह रहते हैं। हमारे परिवार इतने कंजरवेटिव हैं कि मेरी भी उनसे बात करने की हिम्मत नहीं होती। मेरे हसबैंड कहते हैं कि अगर घरवालों को उनका सच पता चल गया तो वो आत्महत्या कर लेंगे। उनके पिता ये बर्दाश्त ही नहीं कर सकते कि उनका बेटा होमोसेक्शुअल है। सबकी परवाह करने, सबकी खुशी का ख्याल रखने में मेरी खुशियों का गला घुट गया है। मैं क्या करूं, प्लीज हेल्प मी।
एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।
आप एक बहुत तकलीफदेह अनुभव से गुजर रही हैं। शादी का संबंध एक भरोसे और विश्वास के साथ शुरू होता है। इस रिश्ते में भरोसे की जगह आपको दुख, धोखा और अकेलापन मिला। इस दुख की कई परतें हैं। यह इमोशनल, सेक्शुअल पेन तो है ही, साथ ही इसकी कई सांस्कृतिक परतें भी हैं।
शादी के चार साल गुजर जाने के बाद भी आप और आपके पति के बीच कोई फिजिकल रिलेशन नहीं है। मैरिटल और लीगल, दोनों ही नजरिए से यह कोई मामूली बात नहीं। इस रिश्ते में म्यूचुअल कंसेंट और इंटीमेसी, दोनों ही चीजों का अभाव है, जो कि शादी की बुनियाद है।

कानून की नजर में आपकी शादी
हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अगर विवाह में शारीरिक निकटता नहीं हुई है तो वह शादी वैध नहीं मानी जाती और इस आधार पर कोर्ट से शादी को रद्द किया जा सकता है। भारतीय विवाह कानून इसे शादी को खत्म करने का वैलिड आधार मानता है। आपके पास दोनों ही विकल्प मौजूद हैं। आप अपनी शादी को कोर्ट से रद्द भी करवा सकती हैं या फिर आपसी सहमति के आधार पर तलाक भी ले सकती हैं।
पति की सेक्शुअल आइडेंटिटी
आपके पति ने यह जानते हुए भी आपसे शादी की कि वे समलैंगिक (गे) हैं। मानवीय आधार पर उनकी तकलीफ को भी समझा जा सकता है। भारतीय समाज इस मामले में आज भी बहुत कंजरवेटिव है और यहां समलैंगिक होना किसी अपराध से कम नहीं, भले ही कानून इसकी इजाजत देता हो। ऐसे में उनके मन में रिजेक्शन का डर होगा, अपना सच बताने का साहस नहीं होगा।
ये सारी बातें वैलिड हैं और इसके लिए इंपैथी भी है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आपके साथ जो किया, वो गलती कम नहीं हो जाती। अपना सच बताए बगैर, किसी को अंधेरे में रखकर शादी करना और फिर आत्महत्या करने की बात करना, इसे किसी भी तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। इसलिए याद रखिए कि अगर इस पूरे प्रकरण में सचमुच कोई विक्टिम है और किसी के साथ गलत हुआ है तो वो आप हैं। ये 10 बातें आप याद रखिए और खुद को रोज याद दिलाइए।

सेक्सलेस मैरिज का मनोवैज्ञानिक प्रभाव
जहां एक ओर शादी में इंटीमेसी और सेक्स का न होना सामाजिक तौर पर सामान्य प्रतीत होता है, वहीं मनोवैज्ञानिक तौर पर इसके प्रभाव बहुत गहरे होते हैं। यह एक तरह का साइकोलॉजिकल ट्रॉमा है, जिसका असर उतना ही घातक होता है, जितना कि इमोशनल नेगलेक्ट का होता है। व्यक्ति में शर्म और डर के भाव पैदा होते हैं, आत्मविश्वास खत्म हो जाता है। ऐसे में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी पर आधारित काउंसलिंग और ट्रॉमा फोकस्ड थेरेपी से मदद मिल सकती है।

पति का आत्महत्या की धमकी देना
चिंता का विषय है, बोझ नहीं
आपके पति का ये कहना कि अगर उनकी सच्चाई के बारे में घरवालों को पता चला तो वो आत्महत्या कर लेंगे। इस बात को गंभीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि यह एक मेंटल हेल्थ रिस्क है। लेकिन याद रखिए कि यह आपकी जिम्मेदारी या आप पर कोई बोझ नहीं है।
आप परवाह कर सकती हैं, लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि आप अपने वेलबीइंग, अपनी फिजिकल और मेंटल हेल्थ को इग्नोर करें।
यहां कुछ बातें ध्यान रखने की हैं-
- किसी व्यक्ति का आत्महत्या की धमकी देना इस बात का संकेत है कि वो मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है।
- उसे मेडिकल अटेंशन की जरूरत है।
- उसे किसी प्रोफेशनल काउंसलर की मदद चाहिए।
- यह ब्लैकमेलिंग है और इससे डरने की जरूरत नहीं है।
- यह धमकी कोई वैलिड कारण नहीं है कि आप उसकी बात मानकर चुप रहें।

आगे का कानूनी रास्ता
भारतीय कानून आपको इस शादी से अलग होने की इजाजत और सहूलियत देता है। मेरा सुझाव है कि आप डरने की बजाय अपने और अपने पति के घरवालों से इस बारे में खुलकर बात करें और डिवोर्स की प्रक्रिया शुरू करें। आप म्यूचुअल कंसेंट से डिवोर्स ले सकती हैं और अगर ऐसा मुमकिन न हो तो अपनी शादी को रद्द करने के लिए भी कोर्ट में अर्जी दे सकती हैं। लेकिन इसकी शुरुआत बातचीत से ही करनी होगी।
पति से इस विषय पर बात कैसे करें
- सबसे पहले खुद को मेंटली और इमोशनली तैयार करें।
- बात करने के लिए शांत, प्राइवेट जगह चुनें।
- बातचीत का मुख्य पहलू है- शांति के साथ सच बोलना। दोष नहीं देना।
- बात की शुरुआत इंपैथी से करें, आरोप न लगाएं। जैसेकि
“मैं तुम्हारी तकलीफ भी समझ सकती हूं। मुझे पता है, तुम पर बहुत प्रेशर है। लेकिन ये चुप्पी मुझे तकलीफ दे रही है। मैं इस तरह से जीना डिजर्व नहीं करती। मुझे भी प्यार और खुशी पाने का हक है।”
- मौजूदा रिश्ते में स्पष्ट बाउंड्री बनाएं। जैसेकि-
“मैं इस शादी में नहीं रह सकती, जहां कोई इंटीमेसी नहीं है। तुम्हारे लिए मेरे मन में बहुत सम्मान और हमदर्दी है, लेकिन मुझे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना है।”
- बातचीत में आगे का रास्ता क्लीयर करें। जैसेकि
“हमें आपसी सहमति से सम्मान के साथ अलग हो जाना चाहिए। इससे हम दोनों का सम्मान बना रहेगा और पब्लिकली कोई विवाद नहीं होगा।”
- बिना कोई जिम्मेदारी या अपराध बोध महसूस किए अपने पति की भावनाओं और सेफ्टी को भी एड्रेस करें। जैसेकि-
“अगर तुम्हें निराशा और अकेलापन महसूस होता है तो तुम काउंसलर की हेल्प लो। तुम्हारी जिंदगी और खुशी मायने रखती है, लेकिन मैं दुखी और नाखुश होकर इस रिश्ते को ढोती रहूं तो इससे तुम्हारा अकेलापन दूर नहीं होगा।”
- अगर वह सचमुच सुसाइडल होने लगे तो तुरंत प्रोफेशनल हेल्प लें।

दोनों परिवारों से बात कैसे करें
अपने माता-पिता से
- सम्मान के साथ बातचीत शुरू करें।
- अपने अनुभव साझा करें।
- शर्म, संकोच, डर न महसूस करें।
- पूरी बात उन्हें ईमानदारी से बताएं।
- अपना सच साफ शब्दों में बयां करें।
- अपना आगे का रास्ता भी बताएं।
- साफ बताएं कि आप खुश नहीं हैं।
- आप इस शादी में अब नहीं रह सकतीं।
- किसी भी तरह का क्रोध, नाराजगी न दिखाएं।
- उन्हें भी किसी तरह का दोष न दें।
- सिर्फ अपना सच पूरी ईमानदारी से बोलें।
हसबैंड के माता-पिता से
- अगर हसबैंड की सहमति हो, तभी बात करें।
- तभी बात करें, जब आप सुरक्षित महसूस करें।
- किसी तरह का आरोप न लगाएं।
- संक्षेप में सिर्फ अलग होने की बात कहें।
- बताएं कि पति और मेरे बीच कुछ ऐसे मतभेद हैं, जो ठीक नहीं हो सकते।
- हम आपसी सहमति से यह शादी खत्म कर रहे हैं।
- अगर हसबैंड की सेक्शुएलिटी के बारे में बताने से उसे रिस्क हो तो इस बात को उजागर न करें।

चार हफ्ते का सेल्फ हेल्प प्लान
सप्ताह 1
ग्राउंडिंग और क्लैरिटी
- रोज डायरी लिखें।
- खुद को याद दिलाएं, इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। मैं अपनी तरफ से ईमानदार थी।
- दूसरे व्यक्ति के लिए इंपैथी रखें, लेकिन याद रखें, अपने लिए भी इंपैथी जरूरी है।
- ब्रीदिंग टेक्नीक फॉलो करें।
- स्लीप हाइजीन का ध्यान रखें। 8 घंटे की नींद जरूर लें।
- सेहत और फूड का भी ख्याल रखें।
सप्ताह 2
इमोशनल एक्सप्रेशन
- कोई वुमेन सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें।
- कोई थेरेपी ग्रुप जॉइन करें।
- जरूरत हो तो प्रोफेशनल हेल्प लें।
- काउंसलर के पास जाएं।
सप्ताह 3
एसर्ट करना सीखें
- किसी तरह का गिल्ट न महसूस करें।
- खुद को रोज याद दिलाएं- इसमें आपकी कोई गलती नहीं है।
- याद रखें, सेल्फ केयर आपकी जिम्मेदारी है।
- रोज आईने के सामने खड़ी होकर कहें- “आय केयर फॉर मायसेल्फ।”
सप्ताह 4
प्रैक्टिकल प्लानिंग
- अपने सारे पर्सनल डॉक्यूमेंट जमा करें।
- सारे जरूरी कागज एक जगह सेव करें।
- किसी पहचान के लॉयर से संपर्क करें।
- पति का घर छोड़कर कहीं और रिलोकेट करें।
- शांति और धैर्य से आगे की प्लानिंग करें।
निष्कर्ष
आपकी शादी की बुनियाद ही गलत थी। यह झूठ और धोखे के साथ बना रिश्ता था। इस शादी को तोड़कर आप कुछ भी गलत नहीं करेंगी। इसलिए किसी तरह का गिल्ट मत महसूस करिएगा। आपके पास पूरा अधिकार है कि आप गरिमा और सम्मान के साथ इस रिश्ते को खत्म करें और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ें। दूसरों के प्रति करुणा बरतना हमारी इंसानी जिम्मेदारी तो है, लेकिन हमारी सबसे पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी खुद अपने प्रति है। आप अपने प्रति वो जिम्मेदारी निभाइए।
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