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26 मिनट पहले
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सवाल– मेरी उम्र 35 साल है। मैं बेंगलुरू में रहती हूं। मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं और पिछले दो साल से हम ओपन रिलेशनशिप में हैं। हमारी लव मैरिज थी, लेकिन हसबैंड इस बात को लेकर हमेशा ओपन थे कि उसे मेरे अलावा दूसरी महिलाएं भी अच्छी लग सकती हैं। पहले ये बात मुझे मजाक लगती थी, लेकिन फिर एक दिन उसने शादी को ओपन रिलेशनशिप की तरह ट्रीट करने की डिमांड कर दी। उसकी पर्सनैलिटी और चार्म ही ऐसा है कि वो हमेशा अपनी बातों से कन्विंस कर लेता है। मैं राजी तो हो गई, लेकिन वो सब कभी कर नहीं पाई, जो वो कर रहा है। ये उसका ही एकतरफा डिसिजन था, जो मुझ पर थोप दिया गया। अब मैं एक अजीब सी घुटन महसूस करती हूं। हमेशा स्ट्रेस में रहती हूं। मैं क्या करूं?
एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।
सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। भारत में अधिकांश विवाह कमिटेड मोनोगैमी (एकनिष्ठ संबंध) ही समझे और माने जाते हैं। अगर शादी के बाद एक साथी ओपन रिलेशनशिप की डिमांड करे, तो यह केवल लाइफस्टाइल का मुद्दा नहीं रहता। यहां सहमति, पावर–बैलेंस और मेंटल हेल्थ जैसे बहुत से जरूरी और बुनियादी सवाल भी मौजूं हो जाते हैं।
किसी भी स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद आपसी सम्मान, अपनी स्वायत्तता और इच्छा से दी गई सहमति और फैसलों में बराबरी पर टिकी होती है। यदि इन चीजों में से कोई एक भी अनुपस्थित हो, तो रिश्तों में तनाव और असंतुलन पैदा हो सकता है।

सहमति के पीछे का मनोविज्ञान
ऐसी परिस्थितियों की शुरुआत अक्सर हल्के–फुल्के मजाक के साथ होती है। एक पार्टनर मजाक में यह कह सकता है कि ‘मुझे दूसरे लोग भी आकर्षक लगते हैं’ या ‘ओपन रिलेशनशिप का आइडिया भी कितना इंटरेस्टिंग हो सकता है।’ साइकोलॉजी में इसे ‘चेकिंग बाउंड्रीज’ (सीमा चेक करना) कहा जाता है। मनोविज्ञान में ‘बाउंड्रीज चेक करने’ का मतलब है, अपनी या दूसरे व्यक्ति की सीमाएं देखना, समझना, तय करना, उसे डिफाइन करना।
कोई व्यक्ति पहले हंसी–मजाक में अपने विचार रखता है और दूसरे की प्रतिक्रिया देखता है। अगर दूसरा साथी इसे गंभीरता से नहीं लेता, तो धीरे-धीरे यही बात रीअल प्रपोजल में बदल सकती है।
कई लोग बाद में सोचते हैं कि उन्होंने उस समय इस बात को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। इसके पीछे कुछ सामान्य मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। जैसेकि–
- कभी-कभी व्यक्ति रिश्ते को खोने से डरता है।
- कभी वह संघर्ष से बचना चाहता है।
- कभी उसे लगता है कि साथी को खुश रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- कई समाजों में यह भी सिखाया जाता है कि रिश्ते को बनाए रखने के लिए एडजस्टमेंट करना जरूरी होता है।
परसुएशन या मैनिपुलेशन: एक बारीक रेखा
इसी तरह कई बार एक पार्टनर कहता है कि दूसरा पार्टनर हमेशा अपनी बातें मनवा लेता है। जैसाकि आपने भी अपने पार्टनर के लिए लिखा है, “उसकी पर्सनैलिटी और चार्म ही ऐसा है कि वो हमेशा अपनी बातों से कन्विंस कर लेता है।”
लेकिन यहां इस बात के गहरे निहितार्थ को समझना जरूरी है। इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि पार्टनर का व्यक्तित्व बहुत प्रभावी है। लेकिन दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि वह इनडायरेक्ट तरीके से भावनात्मक दबाव बना रहा हो। या लगातार ‘परसुएशन’ कर रहा हो। परसुएशन का अर्थ है कि एक बात को अनेकों बार कहना, अनुनय–विनय, याचना करना और आखिरकार अपनी बात मनवा ही लेना।
कई बार परसुएशन और मैनिपुलेशन के बीच की रेखा बहुत धुंधली होती है। व्यक्ति को बाद में यह महसूस होता है कि उसने सहमति तो दी थी, लेकिन यह सहमति वास्तव में उसकी अपनी मर्जी, खुशी और इच्छा से नहीं दी गई थी।

रिश्तों में पावर इंबैलेंस
जब कोई व्यक्ति कहता है कि निर्णय उस पर थोपा गया तो यह रिश्ते में पावर इंबैलेंस (शक्ति के असंतुलन) का संकेत हो सकता है। हेल्दी रिश्तों में महत्वपूर्ण फैसले बातचीत और आपसी सहमति से लिए जाते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके पास सहमत होने के अलावा वास्तव में कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो वह कई कारणों से पार्टनर के फैसलेे में हामी भर सकता है। जैसेकि–
- हो सकता है कि उसे रिश्ते के टूट जाने का डर हो।
- हो सकता है कि वह पार्टनर पर इमोशनली पूरी तरह डिपेंडेंट हों।
- हो सकता है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी हो।
- हो सकता है कि वो खुद को बहुत कमजोर और वलनरेबल महसूस करता हो।
ऐसी परिस्थितियों में लगातार घुटन और तनाव महसूस होना बहुत स्वाभाविक इमोशनल रिएक्शन है। अगर संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहे तो इससे नींद की समस्या, एंग्जाइटी, इमोशनल फटीग, आत्मसम्मान में कमी जैसे अनुभव हो सकते हैं। ये सारे संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि व्यक्ति की भावनात्मक जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं।

सबसे पहले जरूरी है खुद को समझना
आपके सवाल ने बहुत से तथ्य साफ कर दिए हैं, लेकिन फिर भी आपकी स्थिति का मूल्यांकन आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। आपको खुद से कुछ सवाल पूछने और अपना सेल्फ इवैल्यूएशन करने की जरूरत है।
ये पहला कदम है। जब जमीनी स्थिति साफ समझ में आएगी तभी आप ये तय कर पाएंगी कि आगे आपको कौन–सा रास्ता चुनना चाहिए, कौन से फैसले करने चाहिए। तो आइए शुरू करते हैं।
सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट 1
मैंने ओपन रिलेशनशिप के लिए सहमति क्यों दी?
यहां पहला और सबसे जरूरी सवाल ये है कि आप अपनी मर्जी के खिलाफ जाकर ओपन रिलेशनशिप के लिए राजी क्यों हुईं। आपने हामी क्यों भरी। यह सवाल किसी तरह का आरोप नहीं है। यह अपने आत्म–मूल्यांकन का पहला सबसे जरूरी कदम है।
मैंने सहमति दिए जाने के पीछे कुछ संभावित कारणों का ऊपर जिक्र किया है। लेकिन आपको अपना इवैल्यूएशन करके यह समझना है कि आपके फैसले के पीछे सबसे बड़ा और ठोस कारण क्या था।
नीचे ग्राफिक में कुछ 6 सवाल दिए हैं। आपको इन सवालों को 1 से 10 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपको लगता है कि यह सबसे बड़ा और ठोस कारण था तो 10 नंबर दें और अगर आपको लगता है कि यह बहुत ही मामूली कारण था तो 1 नंबर दें। बहुत धैर्य और शांति से सोच–समझकर हर सवाल को नंबर दें और अंत में अपने स्कोर का मूल्यांकन करें।

यदि आपका कुल स्कोर बहुत ज्यादा है तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि उस समय आपने जो निर्णय लिया, वह एक स्वतंत्र निर्णय नहीं था। वह अपनी मर्जी और खुशी से लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि वह दूसरे व्यक्ति के डर या दबाव से प्रभावित फैसला था।
इन भावनाओं को समझने के बाद यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि क्या रिश्ते में परसुएशन या मैनिपुलेशन के संकेत भी मौजूद हैं।
सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट 2
क्या मैं रिलेशनशिप में इमोशनल दबाव महसूस करती हूं?
यह किसी भी रिश्ते का सबसे अहम पहलू है कि दोनों पक्ष भावनात्मक रूप से कितना सुरक्षित महसूस करते हैं और दोनों में कितनी बराबरी है। जब एक पक्ष इमोशनल प्रेशर महसूस करे या इमोशनली इनसिक्योर महसूस करे तो रिश्ता अनहेल्दी हो सकता है।
इसे समझने के लिए मैं आपको एक सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक में कुल 8 सवाल हैं। इन सवालों को आपको 0 से लेकर 3 तक के स्केल पर स्कोर करना है। 0 का अर्थ है ‘कभी नहीं’ और 3 का अर्थ है ‘लगभग हमेशा।’ जैसेकि अगर पहले सवाल का आपका जवाब ‘कभी नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर जवाब ‘लगभग हमेशा’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने स्कोर की एनालिसिस करें।
यहां अलग से कोई स्कोर इंटरप्रिटेशन चार्ट नहीं दिया गया है। लेकिन अगर आपका टोटल स्कोर ज्यादा है तो यह रिश्ते में एक तरह के पावर इंबैलेंस का संकेत हो सकता है।

सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट 3
क्या मेरे पास सपोर्ट सिस्टम है?
ऊपर दिए गए सवालों पर विचार करने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम अपनी ताकत और अपने सपोर्ट सिस्टम को आइडेंटिफाई करना है। जब व्यक्ति इमोशनल स्ट्रेस में होता है, तो उसे लगता है कि वह अकेला है, जबकि यह सच नहीं होता। उसके आसपास ऐसे लोग होते हैं, जिन पर वह भरोसा कर सकता है, अपना मन साझा कर सकता है।
साथ ही कई बार ऐसा भी लग सकता है कि हम कमजोर हैं या हममें कोई अच्छी, सुंदर बात नहीं है। लेकिन जरूरी नहीं कि ये बात सच हो। कई बार व्यक्ति को अपनी स्ट्रेंथ का अंदाजा नहीं होता। इसलिए उसे एक्टिवली इस बारे में सोचने और अपनी ताकत को पहचानने की जरूरत है।
नीचे ग्राफिक में 5 सवाल दिए हैं। आपको खुद को इन सवालों का जवाब देना है। चौथे सवाल में अपनी स्ट्रेंथ को उदाहरण के साथ आइडेंटिफाई करना है।

सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट– 4
क्या इस रिलेशनशिप में बदलाव संभव है?
जैसाकि मैंने ऊपर बताया, अपनी ताकत की पहचान करना आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। जब व्यक्ति अपनी भावनाओं और अपने सपोर्ट सिस्टम को पहचान लेता है, तब अगला चरण यह समझना होता है कि यदि वह असहमति व्यक्त करे, अपना पक्ष रखे तो उसके संभावित नतीजे क्या हो सकते हैं।
नीचे ग्राफिक में आपको इसी सवाल के जवाब को आइडेंटिफाई करना है। खुद से ये चार सवाल पूछें और उसका जवाब दें। इन सवालों का जवाब आपको बातचीत की तैयारी में मदद करेगा।

बातचीत की शुरुआत कैसे करें?
बातचीत शुरू करने के लिए एक सरल ढांचा उपयोगी हो सकता है। जैसेकि–
- पहले वस्तुस्थिति को बताना, फैक्ट सामने रखना।
- फिर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना।
- फिर अपनी जरूरत को साफ ढंग से व्यक्त करना।
- अंत में समाधान की दिशा सुझाना।
उदाहरण के लिए आप कह सकती हैं कि–
- मैं ओपन रिलेशनशिप में कंफर्टेबल नहीं हूं।
- ये बिल्कुल एकतरफा फैसला है।
- मैं असुरक्षित और दुखी महसूस करती हूं।
- शादी में आपसी सहमति और सम्मान बहुत महत्वपूर्ण है।
- शादी में हर फैसला दोनों पक्षों की मर्जी से होना चाहिए।
- मैंने इमोशनल प्रेशर में हां कहा, डर और इनसिक्योरिटी के कारण हां कहा।
- लेकिन सच ये है कि मैं इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं हूं।
- मेरी मानसिक और शारीरिक सेहत पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
- मैं ये बातें इसलिए कह रही हूं, क्योंकि मुझे यकीन है कि तुम समझोगे।
बुद्धिमान और मजबूत लोग भी क्यों रहते हैं ऐसे रिश्ते में
यहां यह भी समझना महत्वपूर्ण है कि कई बुद्धिमान और मजबूत लोग भी ऐसे संबंधों में क्यों बने रहते हैं। इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। बचपन के अनुभव व्यक्ति के वयस्क जीवन के रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोगों के भीतर रिश्ते के टूटने या साथी के छूट जाने का डर इतना प्रबल होता है कि वह अपनी वास्तविक जरूरतों को दबा देता है, अपनी बाउंड्रीज को प्रोटेक्ट नहीं कर पाता है।
एक और कारण यह है कि कभी-कभी संबंध में प्यार और दूरी का चक्र चलता रहता है। कभी बहुत ज्यादा प्यार मिलता है और तो कभी बहुत दबाव या दूरी। यह अनिश्चितता एक उम्मीद बनाए रखती है कि भविष्य में सब ठीक हो जाएगा।
समझौतों की शुरुआत हमेशा एक छोटे समझौते से होती है। फिर वो बड़े होते जाते हैं और अंत में व्यक्ति एक ऐसी जगह पहुंच जाता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
कई लोग अपने फैसले को डिफेंड भी करने लगते हैं क्योंकि सच को स्वीकारना उनके लिए कठिन होता है। इसके अलावा रिश्ते में अच्छा खासा वक्त गुजर चुका होता है, इंवेस्टमेंट होता है, ढेरों साझा यादें होती हैं। ये सब चीजें भी व्यक्ति को रिश्ते को तोड़ने से रोक सकती हैं।
निष्कर्ष
मैं आपको ऐसा कोई सुझाव नहीं दे सकता कि आपको रिश्ते में रहना चाहिए या अलग हो जाना चाहिए। ये आपका अपना फैसला होगा। लेकिन मैं जो कर सकता हूं, वो ये कि आपको स्थिति के हर पहलू को देख सकने में मदद करूं। हरेक कारण को समझने में मदद करूं।
इन सभी कारणों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे व्यक्ति अपने अनुभव को किसी दोष या कमजोरी के रूप में नहीं बल्कि एक जटिल मानवीय प्रक्रिया के रूप में देख पाता है।
फिर भी अंत में मैं कहना चाहूंगा कि एक स्वस्थ रिश्ते की पहचान बहुत साफ होती है। उसमें व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और स्वतंत्र महसूस करता है। यदि कोई लगातार घुटन, चिंता या आत्मसम्मान में कमी महसूस कर रहा है, तो यह इस बात का संकेत है कि रिश्ते में बदलाव की जरूरत है। ऐसे समय में भरोसेमंद दोस्तों, परिवार या किसी प्रोफेशनल काउंसलर की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।
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इस डिजिटल युग में पोर्नोग्राफी बहुत आसानी से उपलब्ध है। बहुत व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल भी होता है। इसलिए बहुत से इंडीविजुअल और कपल इसे लेकर थोड़ा चिंतित होते हैं कि कहीं ये मेंटल हेल्थ, इंटिमेसी और रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर न डाले। आगे पढ़िए…
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