रायबरेली: मानव जीवन में पेड़-पौधों का बहुत बड़ा महत्व है. ये न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचाते हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी कई तरह से लाभकारी होते हैं. आयुर्वेद में अनेक पेड़-पौधों को औषधीय रूप में वर्णित किया गया है, जो शरीर को विभिन्न रोगों से बचाने में सहायक माने जाते हैं.
इन्हीं औषधीय पौधों में अर्जुन का वृक्ष भी शामिल है, जो अपने खास गुणों के लिए जाना जाता है. आइए आयुष चिकित्सक से जानते हैं कि आयुर्वेद में अर्जुन का क्या महत्व है और इसका कौन-सा भाग सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है.
आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाली रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय, शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्मिता श्रीवास्तव (BAMS, लखनऊ विश्वविद्यालय) बताती हैं कि अर्जुन के पौधे को वैज्ञानिक भाषा में Terminalia arjuna कहा जाता है. अर्जुन की छाल में एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोकेमिकल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मज़बूत बनाने में मदद करते हैं.
कई बीमारियों से बचाने में होता है कारगर
यही कारण है कि आयुर्वेद में अर्जुन का उपयोग कई औषधियों के निर्माण में किया जाता है. डॉ. स्मिता के अनुसार अर्जुन की छाल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व, फ्लेवोनोइड्स, टैनिन, गैलिक एसिड और अन्य फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं. ये तत्व शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं.
इन बीमारियों के लिए है वरदान
अर्जुन की छाल का सेवन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज (शुगर), गठिया, पाचन संबंधी समस्याओं और कुछ त्वचा रोगों में लाभकारी माना जाता है. नियमित और सही तरीके से सेवन करने पर इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं.
कैसे करें सेवन?
डॉ. स्मिता कहती हैं कि अर्जुन की छाल को सुखाकर उसका काढ़ा बनाकर दिन में दो बार लिया जा सकता है. इसके अलावा छाल को पीसकर पाउडर के रूप में भी सेवन किया जाता है. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे या घरेलू उपाय का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है.