चीन से MBBS, दिल्ली में लाखों की नौकरी, सबकुछ छोड़ गांव में रह रहे डॉक्टर साहब

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Balaghat News: निरंजन कुमार ने कहा कि भले ही वह पुरानी धारा से जुड़कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं लेकिन उन्होंने आधुनिकता को नहीं छोड़ा है. वह आज भी मरीजों से बातचीत करते हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिकता गलत नहीं है लेकिन अति से नुकसान होता है.

बालाघाट. आमतौर पर माता-पिता की चाहत होती है कि उनका बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें. अच्छी पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी करें. नौकरी लग जाए, तो वे बेहतर जिंदगी गुजारें लेकिन एक युवक अपना सबकुछ छोड़ मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के एक छोटे से गांव नंदोरा में रह रहा है. आपको जानकारी हैरानी होगी कि उसने चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई की, फिर दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में बतौर डॉक्टर सेवाएं भी दीं लेकिन ऐसा क्या हुआ कि वह सबकुछ छोड़कर बालाघाट जिले के छोटे से गांव में आकर रहने लगा.

मूलत: आंध्र प्रदेश के रहने वाले निरंजन कुमार पांच साल पहले तक बतौर डॉक्टर दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में नौकरी कर रहे थे लेकिन धीरे-धीरे उनका उस जिंदगी से मोहभंग होता गया और उन्होंने अचानक फैसला किया कि वह सादगी से जीवन बिताएंगे. ऐसे में वह लाखों की नौकरी और काम छोड़ बालाघाट जिले के एक छोटे से गांव नंदोरा में आकर रहने लगे. अब उन्होंने यहां पांच एकड़ जमीन खरीदी है और एक मिट्टी का गोल आकार में घर बनाया. अब वह यहीं रहते हैं. उनके इस फैसले से माता-पिता नाराज हैं लेकिन वह दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि वह जीवन को न्यूनतम संसाधनों के साथ जी रहे हैं.

खेती पर निर्भर निरंजन कुमार
निरंजन कुमार गांव में बेहद कम संसाधनों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं. उन्होंने अपनी लग्जरी लाइफ छोड़ गांव में जिंदगी बिताने का फैसला किया. आपको बता दें कि वह गांव में मिट्टी के मकान में रहते हैं. जीवनयापन के लिए खेती पर निर्भर रहते हैं. वह पूरी तरह से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इसमें वह धान के साथ कई तरह की फसलों को लगा रहे हैं. वह खुद ही मेहनत करते हैं.

ऐसी है निरंजन कुमार की दिनचर्या
निरंजन बताते हैं कि वह सुबह चार बजे उठते हैं और योग करते हैं. साथ ही दो-दो दिनों तक उपवास रखते हैं. वह कहते हैं कि उपवास से ही बीमारी से दूर रहा जा सकता है. वह लंबे समय से बीमार भी नहीं पड़े हैं. वह सलाह भी देते हैं कि हमारे घर में सभी दवाइयां हैं. बाहर की दवाइयों की जरूरत नहीं है.

‘उस धारा को फिर से जीवित करने की जरूरत’
लोकल 18 ने जब उनसे पूछा कि वह ऐसे जीवन क्यों बिता रहे हैं, इसकी कोई खास वजह, तब निरंजन कहते हैं, ‘मैं चीन में भी रहा और दिल्ली में भी. चीन भले ही प्रोग्रेसिव देश हो लेकिन लोग वहां भी अपने कल्चर को भूल रहे हैं. वहीं दिल्ली में भी ऐसा ही माहौल है. वहीं दुनिया भारत को अध्यात्म की राजधानी मानती है. तब हमें उस धारा को फिर से जीवित करने की जरूरत है. ऐसे में हमें हमारे देश की पुरानी धारा में लौटना चाहिए. मेरी भी यही कोशिश है कि मैं कम से कम संसाधनों में अपना जीवन जीने की कोशिश करूं. अपने देश के लोगों को भी बताऊं कि कम से कम संसाधनों में भी जीवन जिया जा सकता है.’

सब कुछ नहीं छोड़ा
निरंजन का कहना है कि भले ही वह पुरानी धारा से जुड़कर अपना जीवन जी रहे हैं लेकिन उन्होंने आधुनिकता को नहीं छोड़ा है. वह नई रिसर्च और मरीजों से अब भी बातचीत करते हैं. उनका कहना है कि आधुनिकता गलत नहीं है लेकिन अति से नुकसान होते हैं.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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