Mitti Ka Ghada Kaise Kharide : बढ़ती गर्मी में ठंडा पानी सुकून देने का काम करती है. लोग आमतौर पर फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी पीते हैं. लेकिन अक्सर यह सेहत को नुकसान पहुंचाती है और प्यास भी नहीं बुझाती. ऐसे में अगर आप घर मिट्टी का मटका ले आएं तो यह आपके प्यास को भी बुझाएगी और सेहत भी अच्छी रहेगी. मिट्टी के घड़े का पानी नेचुरल रूप से पानी को ठंडा करता है.
लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती है कि उनके मटके का पानी सही तरीके से ठंडा ही नही होता.दरअसल, जानकारी के अभाव में कई लोग मिट्टी का घड़ा तो खरीद लेते हैं लेकिन अच्छे घड़े का चुनाव करना नहीं जानते. तो चलिए जानते हैं कि बाज़ार से मटका खरीदने से पहले किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है.
मिट्टी का मटका खरीदते वक्त रखें इन बातों का ख्याल(Tips to buy good clay pot):
1. बनावट और फिनिशिंग पर दें ध्यान
घड़ा खरीदते समय उसे चारों तरफ से हाथ लगाकर जांचें. देखें कि कहीं कोई दरार (crack) या चटकन तो नहीं है. एक अच्छा मटका हर तरफ से एकसमान मोटाई का होना चाहिए. अगर कहीं से पतला और कहीं से मोटा है, तो पानी के दबाव से उसके जल्दी टूटने का डर रहता है.
2. रंग से पहचानें मिट्टी की शुद्धता
असली और नेचुरल मिट्टी का मटका हल्का लाल, भूरा या बादामी रंग का होता है. अगर मटका बहुत ज्यादा चमकीला या गहरा लाल दिख रहा है, तो सावधान हो जाएं! कई बार इन्हें आकर्षक बनाने के लिए केमिकल पेंट या पॉलिश का इस्तेमाल किया जाता है, जो मटके के रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं और पानी ठंडा नहीं हो पाता.
3. ‘टन-टन’ की आवाज है मजबूती का सबूत
मटके की मजबूती जांचने का सबसे पुराना और हिट तरीका है उसे उंगली से ठकठकाकर देखना. अगर ठोकने पर ‘टन-टन’ जैसी साफ और धातु जैसी खनक सुनाई दे, तो समझ लें कि मिट्टी अच्छी तरह पकी हुई है. इसके विपरीत, अगर ‘भप-भप’ जैसी भारी या दबी हुई आवाज आए, तो समझ लीजिए कि मटका कच्चा है या अंदर कोई बारीक दरार है.
4. नेचुरल पोर्स कूलिंग का साइंस
मटके में पानी ठंडा होने के पीछे ‘वाष्पीकरण’ (Evaporation) का विज्ञान काम करता है. घड़े की सतह पर सूक्ष्म छिद्र होने चाहिए ताकि पानी हल्का सा रिसकर हवा के संपर्क में आए और अंदर के पानी को ठंडा करे. बहुत ज्यादा चिकने या पेंटेड मटकों में ये छेद बंद हो जाते हैं, जिससे पानी मटके में रहने के बावजूद गर्म ही रहता है.
5. सही आकार और ढक्कन का चुनाव
अपनी जरूरत के हिसाब से मटका चुनें, लेकिन यह जरूर देखें कि उसका मुंह इतना चौड़ा हो कि अंदर हाथ डालकर सफाई की जा सके. हमेशा मटके के साथ उसी की फिटिंग का मिट्टी का ढक्कन लें. यह पानी को धूल-मिट्टी से बचाने के साथ-साथ तापमान को भी मेंटेन रखता है.
मटका लाने के बाद क्या करें?
- 24 घंटे का नियम: नया मटका घर लाते ही उसमें पीने का पानी न भरें. पहले उसे 24 घंटे सादे पानी में भिगोकर छोड़ दें, फिर वह पानी फेंककर ही इस्तेमाल शुरू करें.
- सफाई में बरतें सावधानी: मटके को धोने के लिए कभी भी साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें. मिट्टी केमिकल सोख लेती है. सफाई के लिए केवल सादा या गुनगुना पानी और सूती कपड़े का प्रयोग करें.
- हाइजीन का रखें ख्याल: अगर आप बार-बार हाथ अंदर नहीं डालना चाहते, तो आजकल बाजार में मिलने वाले ‘नल वाले मटके’ (Tap Matka) एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प हैं.
मिट्टी का घड़ा किस दिन खरीदें और किस दिन नहीं(mitti ka ghada kis din kharidna chahiye)
ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, मिट्टी का घड़ा केवल पानी ठंडा रखने के लिए नहीं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए भी खरीदा जाता है. अगर आप नया मटका खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो इन शुभ-अशुभ दिनों का ध्यान जरूर रखें:
शुभ दिन: मिट्टी का घड़ा खरीदने के लिए बुधवार और शुक्रवार सबसे उत्तम माने जाते हैं. इसके अलावा वैशाख मास, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा और शुक्ल पक्ष में मटका लाना घर में सकारात्मक ऊर्जा और बरकत बढ़ाता है.
अशुभ दिन:मंगलवार और शनिवार को मिट्टी का सामान खरीदना अशुभ माना जाता है, जिससे पारिवारिक कलह या स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. साथ ही अमावस्या, कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन और ग्रहण काल में भी घड़ा खरीदने से बचना चाहिए.
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