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सूडान के दारफुर क्षेत्र के एल-फाशेर शहर में तीन दिनों के भीतर 6,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अर्धसैनिक बल RSF ने सेना के आखिरी ठिकाने पर हमला करते हुए बड़े पैमाने पर हत्या, यौन हिंसा और बच्चों तक की हत्या की. हालात बेहद गंभीर हैं और मौतों का असली आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है.
खार्तूम/दारफुर: अफ्रीकी देश सूडान में तीन दिनों के अंदर 6,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की नई रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में दारफुर क्षेत्र के एल-फाशेर शहर पर हुए भीषण हमलों में भारी खूनखराबा हुआ. यह जानकारी गवाहों के बयानों के आधार पर सामने आई है.
क्या हुआ था?
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्स’ (RSF) के बीच लड़ाई चल रही है. एल-फाशेर दारफुर में सेना का आखिरी बड़ा ठिकाना था. 18 महीने तक घेराबंदी के बाद RSF ने 26 अक्टूबर को शहर पर बड़ा हमला बोल दिया. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि 25 से 27 अक्टूबर के बीच कम से कम 4,400 लोग शहर के अंदर मारे गए. इसके अलावा 1,600 से ज्यादा लोग उस समय मारे गए जब वे जान बचाकर भागने की कोशिश कर रहे थे. यानी सिर्फ तीन दिनों में मरने वालों की संख्या 6,000 से ऊपर पहुंच गई.
किस तरह की हिंसा हुई?
रिपोर्ट के अनुसार, हमलों में बड़े पैमाने पर गोलीबारी, घरों में घुसकर हत्या, महिलाओं के साथ यौन हिंसा, बच्चों समेत लोगों को अगवा करना, यातना देना और बिना किसी सुनवाई के फांसी जैसी घटनाएं शामिल थीं. कई मामलों में हमले जातीय पहचान के आधार पर किए गए. एक घटना में बताया गया कि करीब 1,000 लोग एक यूनिवर्सिटी हॉस्टल में शरण लिए हुए थे. वहां भारी हथियारों से हमला किया गया और लगभग 500 लोगों की मौत हो गई. एक अन्य मामले में करीब 600 लोगों को एक जगह इकट्ठा करके मार दिया गया, जिनमें 50 बच्चे भी थे. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 28 अक्टूबर को एक अस्पताल पर हमले में भी सैकड़ों लोग मारे गए.
हालात कितने गंभीर हैं?
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि असली मौतों की संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है. पिछले डेढ़ साल से चल रही इस लड़ाई ने सूडान को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकट में धकेल दिया है. लाखों लोग बेघर हो चुके हैं और कई इलाकों में भुखमरी जैसी स्थिति बन गई है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने कहा कि इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से हिंसा का सिलसिला और बढ़ता है.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें
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