बैंक- इंजीनियर की मेरी-कपिल ने छोड़ी नौकरी, रांची में कैफे खोलकर मचा रहे धूम

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Ranchi Top 3 Aadiwasi Cafe : रांची के मेरी किचन, कैफे दी आर्ट और दी ओपन फील्ड ट्राईबल कैफे में शुद्ध और यूनिक आदिवासी खाना मिलता है. यहां खाने वालों की लंबी भीड़ लगती है.

 आज हम आपको झारखंड की राजधानी रांची के 3 ऐसे ट्राईबल कैफे के बारे में बताने वाले हैं. जहां पर आपको शुद्ध खाने के साथ-साथ एकदम अपने गांव की याद आ जाएगी. रांची में जब ट्राईबल कैफे के नाम आता है और मेरी किचन की बात ना हो. ऐसा हो ही नहीं सकता. दरअसल, मेरी एक समय बैंक की नौकरी करती थी. जहां उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना एक छोटा सा किचन शुरू किया और आज ये दो बड़े कैफे का रूप ले लिया है.

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इसकी खासियत यह है कि यहां पर आपको एकदम फ्रेश खाने को मिलेगा. ऐसा लगेगा कि घर से अभी बनाकर आपके सामने परोसा गया है. ट्राइबल खाने के साथ-साथ यहां कोरियन खाना भी परोसा जाता है. कोरियन नूडल्स व कोरियन बोल यह सारी चीज भी यहां पर काफी यूनिक तरीके से देखी जाती है. यहां पर आपको ₹200 में ही कई सारे आइटम एक्सप्लोर कर सकते हैं.

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इसके बाद नाम कपिल टोप्पो का आता है. जिन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर अपना कैफे शुरू किया. इनके कैफे का नाम है कैफे दी आर्ट. इस कैफे में तो घुसते की आपको गांव घर की याद आ जाएगी. धान की कली से गेट को सजाया गया है. पुराना खटिया और मेज बैठने के लिए है.

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इसके अलावा यहां पर आपको मडुवा के नूडल्स, रागी के लड्डू कई सारे ऐसे फ्लेवर देखने को मिलेंगे. जो खासतौर पर आदिवासी खाना पसंद करते हैं. जैसे ढक्कन रोटी यह यहां की स्पेशलिटी है. यहां पर मिनिमम ₹180 से खाने की शुरुआत होती है और 250 रुपए तक जाती है.

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कपिल बताते हैं कि मैंने इंजीनियरिंग की और इसके बाद फ्लिपकार्ट और नॉर्थ कोरिया में अच्छी खासी नौकरी भी की है, लेकिन हमेशा से अपने कल्चर को रिप्रेजेंट करने का मन था. ऐसे में सोचा खाने के जरिए हमारे कम्युनिटी में जो इतने स्वादिष्ट और इतने पौष्टिक वाली चीज है, क्यों ना उसको मॉडर्न तरीके से पेश किया जाए.

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तीसरा है दी ओपन फील्ड. यह आपको खूंटी रोड में देखने को मिलेगा. इस कैफे को यूथ ने मिलकर खोला है. जो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण को भी ध्यान में रखते हुए काम भी कर रहे है. जो एक बहुत बड़ी फील्ड यानी की बहुत बड़ी फॉर्म के रूप में है. यहां पर खेत में जिस तरीके से घूम जाता है उसका आनंद आप ले सकते हैं. यह यूनिक कैफे हैं. जहां पर सच में खेत के बीच में बैठकर खाने का मजा मिलता है.

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यहां पर आप अपने हाथों से सब्जी तोड़कर लाइए और अपने आपके आँखों के सामने एकदम आदिवासी तकनीक से सारी चीज बनायी जाती है. मतलब की मिट्टी की हाड्डी में और मिट्टी के चूल्हे में. यह चीज यहां की स्पेशलिटी है. ऐसे में यह तीनों ही पूरे राज्य में बड़ा हिट है. लोग टाइम निकाल कर यहां जाते हैं.

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