ओटावा: जियो पॉलिटिक्स में भारत एक भरोसेमंद और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है. यही कारण है कि दुनिया भर के कई देश भारत संग ट्रेड डील करने के लिए भागे-भागे आ रहे हैं. EU-अमेरिका जैसी ताकतों के बाद अब इस लिस्ट में कनाडा का नाम भी शामिल होने जा रहा है. हाल ही में इस देश के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मुंबई लैंड हुए हैं. पुराने पीएम ट्रूडो की गलतियां सुधारकर भारत से दोस्ती की नई शुरुआत करना उनका पहला एजेंडा है. जिसकी शुरुआत उन्होंने पंजाब से जुड़ी एक पुरानी परंपरा को तोड़कर की है.
क्या है पंजाब का कनाडा की राजनीति से कनेक्शन?
कनाडाई नेता भारत के पंजाब को अपने देश में ‘प्रवासी राजनीति’ के लिए एक खिलौने की तरह इस्तेमाल करते हैं. कार्नी के भारत दौरे की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने पंजाब जाने का कोई प्लान नहीं बनाया है. जबकि उनसे पहले के लगभग हर प्रधानमंत्री स्वर्ण मंदिर के बहाने पंजाब जरूर गए थे.
कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदाय, खासकर पंजाबी सिख, वहां की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाते हैं. कई बार वोट पाने के चक्कर में वे उन कट्टरपंथी समूहों को भी खुश करने की कोशिश करते हैं जो भारत विरोधी एजेंडा चलाते हैं. भारत सरकार नहीं चाहती कि कोई भी नेता पंजाब को राजनीति के लिए खिलौने की तरह इस्तेमाल करे. यही वजह है कि भारत सरकार कनाडा के इन दौरों को शक की निगाह से देखती है.
स्टीफन हार्पर और जस्टिन ट्रूडो ने अपनी यात्रा के दौरान पंजाब को काफी महत्व दिया था. ट्रूडो का 2018 का दौरा तो उनके पहनावे और डांस की वजह से काफी चर्चा में रहा था. ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत की अखंडता को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचने वाले खालिस्तियों का जमकर सपोर्ट किया था और उनका पंजाब दौरा इसी प्रोपेगेंडा का हिस्सा था.
पंजाब दौरे पर गए थे जस्टिन ट्रूडो
कार्नी ने विदेश नीति में किया बदलाव
साल 2023 में हरदीप सिंह निज्जर के मामले को लेकर जो कड़वाहट पैदा हुई थी, उसे पीछे छोड़कर अब दोनों देश व्यापार और निवेश पर ध्यान देना चाहते हैं. कार्नी का यह दौरा न केवल आर्थिक लिहाज से अहम है, बल्कि यह कनाडा की विदेश नीति में आए एक बड़े बदलाव को भी दिखाता है. पिछले प्रधानमंत्रियों की तरह उनके इस दौरे में पंजाब का नाम शामिल नहीं है, जिसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं.
मार्क कार्नी ने इस बार पंजाब न जाकर एक बड़ा रिस्क लिया है. उनका यह फैसला इस बात का सबूत है कि वोटबैंक की राजनीति के बजाय सीधे तौर पर भारत सरकार के साथ दोस्ती को महत्व देना चाहते हैं. वो खालिस्तानियों के एजेंडे को किसी भी रूप में बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं.
गुस्से में खालिस्तानी सपोर्टर्स
मार्क कार्नी के पंजाब न जाने के फैसले से कनाडा के खालिस्तानी समर्थक काफी गुस्से में हैं. उनका मानना है कि कार्नी ने उनकी भावनाओं को नजरअंदाज किया है. खालिस्तानी संगठन ने बयान जारी कर कहा है कि कार्नी सरकार भारत को खुश करने के लिए उनके मुद्दों को दरकिनार कर रही है. कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने साफ किया है कि इस दौरे का मकसद सिर्फ आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना है और वे कनाडा लौटकर सभी समुदायों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहेंगे.
कनाडाई प्रधानमंत्री के भारत दौरे में क्या-क्या खास?
मार्क कार्नी ने अपनी यात्रा की शुरुआत दिल्ली से नहीं बल्कि भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से की है. शुक्रवार, 27 फरवरी को वे मुंबई पहुंचे और वहां के बड़े बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे. कार्नी का पूरा फोकस भारत के बड़े निवेशकों और कंपनियों के साथ हाथ मिलाने पर है. मुंबई के बाद वे दिल्ली जाएंगे, जहां प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी हाई-लेवल मीटिंग होगी. 2 मार्च को हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच होने वाली बातचीत में कई बड़े मुद्दों पर मुहर लग सकती है.
- खेती और ऊर्जा: दोनों देश खेती, बिजली और क्रिटिकल मिनिरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा सकते हैं.
- पेंशन फंड: कनाडा के बड़े पेंशन फंड्स भारत में निवेश करने की तैयारी में हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.
- सीईओ फोरम: दोनों देशों के बड़े बिजनेस हेड एक साथ बैठेंगे ताकि निवेश के नए रास्ते खुल सकें.
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