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शहरी जीवनशैली में हम दिनभर जूते-चप्पल पहने रहते हैं, जिससे पैरों की नर्व्स पर लगातार दबाव बना रहता है. इसका असर धीरे-धीरे शरीर के संतुलन, मूड और एनर्जी लेवल पर पड़ता है. वहीं नंगे पांव चलना पैरों को नेचुरल मूवमेंट देता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है और नींद व मानसिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिलता है.
शहरी जीवनशैली ने हमारी दिनचर्या को इतना व्यस्त बना दिया है कि हमें याद ही नहीं रहता कि आखिरी बार हम कब जमीन पर नंगे पांव चले थे. घर हो या ऑफिस, किचन से लेकर बेडरूम तक, हमारे पैरों में हर समय चप्पल या जूते रहते हैं. पैरों पर दबाव न पड़े और ज्यादा आराम मिले, इसी सोच के साथ हम महंगे और कंफर्टेबल फुटवियर चुनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी जूते-चप्पल उतारकर नंगे पांव चलना भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है.

हमारे पैरों में 7,000 से ज्यादा नर्व एंडिंग्स होती हैं, जिनका काम शरीर से जुड़े सिग्नल्स को न्यूरॉन्स के जरिए दिमाग तक पहुंचाना होता है. लंबे समय तक टाइट जूते पहनने से ये नर्व्स दब जाती हैं. नंगे पैर चलने पर दिमाग को बेहतर सेंसरी फीडबैक मिलता है, जिससे शरीर का संतुलन, तालमेल और चलने-बैठने की क्षमता सुधरती है. इससे नर्वस सिस्टम ज्यादा अलर्ट और संतुलित रहता है. यही कारण है कि फिजियोथेरेपी और न्यूरोमस्क्युलर ट्रेनिंग में नंगे पैर चलने की सलाह दी जाती है.

लंबे समय तक जूते पहने रहने से पैरों और एड़ी की मांसपेशियां जकड़ जाती हैं. नंगे पांव चलने से तलवे मजबूत होते हैं और एड़ी व टखने का संतुलन बेहतर होता है. इससे कमजोर पैरों को मजबूती मिलती है और कई मामलों में घुटनों के दर्द में भी राहत देखी गई है.
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अगर आप टाइल्स या फर्श की जगह मिट्टी, घास या रेत पर नंगे पांव चलते हैं, तो इसके फायदे और बढ़ जाते हैं. इसे ग्राउंडिंग या अर्थिंग कहा जाता है. इससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है, जो तनाव कम करने में मदद करता है. कई लोगों को इससे मानसिक शांति मिलती है, मूड बेहतर होता है और नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है.

सर्दियों में नंगे पांव चलना और भी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. ठंडी सतह पर कुछ देर चलने से ब्लड वेसल्स को ट्रेनिंग मिलती है कि कब सिकुड़ना है और कब फैलना है. इससे पैरों और उंगलियों तक रक्त संचार बेहतर होता है और धीरे-धीरे ठंड सहने की क्षमता भी बढ़ती है.

ठंड के मौसम में शरीर के जोड़ अकड़ जाते हैं और मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं, जिससे सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है. घर के अंदर ही नंगे पांव चलने से पैरों के छोटे-छोटे जॉइंट्स एक्टिव रहते हैं और नैचुरल मूवमेंट बनी रहती है. पूरे दिन मोटे मोजे और जूते पहनने से जो पैरों में सुस्ती आ जाती है, उससे भी राहत मिलती है.