Last Updated:
ब्रिटेन के अध्ययन में पाया गया कि मेकअप प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल अस्थमा का खतरा बढ़ा सकता है. सस्ते मेकअप में मौजूद केमिकल्स सांस और हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करते हैं.
हाइलाइट्स
- मेकअप से अस्थमा का खतरा 47% तक बढ़ सकता है.
- सस्ते मेकअप में केमिकल्स सांस और हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करते हैं.
- मेकअप के ब्रश, स्पंज और ब्यूटी ब्लेंडर्स की हाइजीन का ध्यान रखें.
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने करीब 40,000 लोगों पर रिसर्च की, जिसमें यह पाया गया कि जो महिलाएं नियमित रूप से लिपस्टिक, आईशैडो, मस्कारा, नकली नाखून, ब्लश या क्यूटिकल क्रीम जैसे मेकअप उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं, उनमें अस्थमा का खतरा 47 प्रतिशत तक अधिक होता है. दरअसल, इन कॉस्मेटिक्स में कई तरह के प्रिजर्वेटिव, हार्मोन-डिस्टर्बिंग केमिकल्स और हेवी मेटल्स मौजूद होते हैं जो हमारी स्किन, सांस और हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करते हैं. इन पदार्थों का लंबे समय तक उपयोग शरीर के अंदर जहरीले तत्वों को जमा कर सकता है, जो इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाते हैं और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में सूजन पैदा कर सकते हैं.
हेल्थ एक्सपर्ट समीर भाटी का कहना है कि मेकअप में मौजूद कुछ केमिकल्स शरीर के हार्मोनल सिस्टम को भी डिस्टर्ब करते हैं, जिससे न सिर्फ रेस्पिरेटरी सिस्टम प्रभावित होती है, बल्कि स्किन एलर्जी और इंफेक्शन के मामले भी बढ़ जाते हैं. उन्होंने सलाह दी कि हमें किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसके लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए और जांचना चाहिए कि उसमें कौन-कौन से केमिकल्स हैं. अगर स्किन सेंसिटिव है या पहले से एलर्जी की समस्या है तो ऐसे केमिकल्स से बचना ही बेहतर है. साथ ही मेकअप के ब्रश, स्पंज और ब्यूटी ब्लेंडर्स की हाइजीन का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए ताकि इंफेक्शन का खतरा कम किया जा सके.
विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18… और पढ़ें