जरूरत की खबर- घर पर बनाएं घी और पनीर: मार्केट प्रोडक्ट में मिलावट, खाने से बीमारियों का रिस्क, जानें घर पर बनाने का तरीका

3 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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देश के अलग-अलग राज्यों से लगभग हर दिन पनीर और देसी घी में मिलावट की खबरें सामने आती रहती हैं। हाल ही में पंजाब में जांचे गए 531 पनीर सैंपल में से 196 घटिया क्वालिटी के और 59 खाने के लिए असुरक्षित पाए गए। वहीं 222 देसी घी के सैंपल में से 20 घटिया और 28 असुरक्षित निकले।

इस पर पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पनीर और देसी घी सबसे ज्यादा मिलावटी खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि इन चीजों को हमेशा भरोसेमंद ब्रांड से खरीदें या घर पर बनाएं, ताकि मिलावट के खतरे से बचा जा सके।

अच्छी बात ये है कि पनीर और देसी घी को घर पर बनाना बेहद आसान है। इसके लिए किसी खास तकनीक या ‘रॉकेट साइंस’ की जरूरत नहीं होती है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम घर पर घी और पनीर बनाने की आसान विधियों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • मिलावटी घी व पनीर खाने से किस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
  • मिलावटी घी और पनीर की पहचान कैसे की जा सकती है?

एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, न्यूट्रिशनिस्ट और ‘वनडाइटटुडे’ की फाउंडर

सवाल- घी और पनीर में किन चीजों की मिलावट की जाती है?

जवाब- पनीर में अक्सर स्टार्च, मैदा, खराब दूध, आटा, डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और यूरिया जैसी खतरनाक चीजें मिलाई जाती हैं, जिससे उसकी मात्रा और सफेदी बढ़ाई जा सके। वहीं देसी घी में डालडा, मार्जरीन, स्टार्च, सस्ते तेल, सिंथेटिक रंग और फ्लेवर मिलाए जाते हैं ताकि वह असली घी जैसा दिखे और महक दे।

सवाल- शुद्ध देसी घी और पनीर की पहचान कैसे की जा सकती है?

जवाब- पनीर और शुद्ध देसी घी की पहचान उसके रंग, बनावट, स्वाद और खुशबू से की जा सकती है। मिलावटी पनीर रबड़ की तरह खिंचता है, जबकि असली पनीर सॉफ्ट होता है। वहीं शुद्ध देसी घी में एक खास तरह की नेचुरल खुशबू होती है।

इसके अलावा कुछ और तरीके हैं, जिससे शुद्ध देसी घी और पनीर की पहचान आसानी से की जा सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- मिलावटी घी और पनीर की जांच कैसे की जा सकती है?

जवाब- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने घी और पनीर में मिलावट की जांच के लिए कुछ आसान घरेलू और वैज्ञानिक तरीके बताए हैं। इससे आप बिना लैब टेस्ट के भी इनके शुद्ध या मिलावटी होने का अंदाजा लगा सकते हैं।

पनीर की शुद्धता जांचने के तरीके

  • पनीर में मिलावट जांचने के लिए सोयाबीन पाउडर टेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए पनीर का एक छोटा टुकड़ा पानी में उबालें और ठंडा होने दें, फिर पानी में अरहर दाल पाउडर या सोयाबीन पाउडर मिलाएं। करीब 10 मिनट बाद अगर पानी या पनीर का रंग हल्का लाल हो जाए तो यह डिटर्जेंट या यूरिया की मौजूदगी का संकेत है।
  • इसी तरह आयोडीन टेस्ट से भी पनीर की शुद्धता पता की जा सकती है। पानी में उबालकर ठंडा किया गया पनीर, अगर आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदों के बाद नीला या काला हो जाए तो यह स्टार्च की मिलावट का संकेत है।

घी की शुद्धता जांचने के तरीके

  • घी में मिलावट की जांच भी काफी आसान है। कटोरी में थोड़ा घी लेकर उसमें आयोडीन की 2–3 बूंदें डाले। अगर रंग बदलता है तो घी मिलावटी है।
  • घी में कंसन्ट्रेटेड हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCL) मिलाकर कुछ देर छोड़ दें। अगर इसका रंग लाल हो जाए तो समझ लीजिए इसमें मिलावट है।

सवाल- मिलावटी घी और पनीर खाने से किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है?

जवाब- मिलावटी घी और पनीर में मौजूद स्टार्च, डिटर्जेंट, यूरिया, सस्ते तेल या सिंथेटिक केमिकल्स पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे पेट दर्द, गैस, दस्त या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

लंबे समय तक इनका सेवन लिवर और किडनी पर दबाव डालता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ मिलावटी पदार्थ एलर्जी, स्किन पर लाल चकत्ते या सांस लेने में समस्या भी पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा मोटापा, हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का खतरा भी बढ़ जाता है।

सवाल- घर पर पनीर बनाने का सही और आसान तरीका क्या है?

जवाब- घर पर पनीर बनाना बहुत आसान है। इसमें न तो बहुत ज्यादा मेहनत लगती है और न ही बहुत ज्यादा समय ही। नीचे दिए ग्राफिक इसे इसे स्टेप-बाय-स्टेप समझिए–

सवाल- घर पर शुद्ध देसी घी कैसे बनाया जाता है?

जवाब- घर पर बना घी न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें कोई मिलावट नहीं होती है। नीचे दिए ग्राफिक से स्टेप-बाय-स्टेप घर पर घी बनाने की विधि समझिए-

सवाल- शुद्ध पनीर और घी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है?

जवाब- शुद्ध पनीर और घी सीमित मात्रा में खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। पनीर प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फोरस का अच्छा सोर्स है, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड इम्यूनिटी और मसल्स रिकवरी में मदद करते हैं।

वहीं घी में हेल्दी फैटी एसिड, विटामिन A, D, E और K होते हैं, जो पाचन तंत्र, स्किन और हाॅर्मोनल बैलेंस के लिए फायदेमंद हैं। आयुर्वेद में घी को मस्तिष्क और पाचन शक्ति बढ़ाने वाला माना गया है। ध्यान रखें कि दोनों का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें ताकि फैट और कैलोरी की अधिकता से बचा जा सके।

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