Last Updated:
Pet Dog Care Tips: इन दिनों पालतू और देसी पिल्लों पर पार्वो वायरस का गंभीर खतरा मंडरा रहा है. जनवरी के अंतिम सप्ताह से लगातार बढ़ रहे मामलों ने पशुपालकों और डॉग लवर्स की चिंता बढ़ा दी है. हालात ऐसे हैं कि जिला पशु चिकित्सालय की ओपीडी में रोजाना 20 से 25 पिल्ले पार्वो जैसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी तेजी से फैलती है और लापरवाही बरती गई तो पूरा लिटर चंद दिनों में खत्म हो सकता है. (शिवांक द्विवेदी/सतना)
सतना में पालतू कुत्तों और देसी पिल्लों में पार्वो वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. पशु चिकित्सकों के अनुसार फरवरी के अंतिम सप्ताह से ओपीडी में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है. गलतफहमी और अधूरा टीकाकरण स्थिति को और गंभीर बना रहा है, जबकि समय पर वैक्सीनेशन से इस जानलेवा बीमारी को रोका जा सकता है.
लोकल 18 से बातचीत में जिला पशु चिकित्सालय सतना के प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती ने बताया कि इस मौसम में तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव होता है जिससे पिल्लों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है. ब्रीडिंग के बाद जब मादा कुतिया बच्चों को जन्म देती है उसी समय यह संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा रहता है.
पार्वो के अलावा कैनल कफ और डिस्टेंपर जैसी बीमारियां भी इसी मौसम में ज्यादा देखने को मिलती हैं. कई मामलों में एक पिल्ले को संक्रमण होने के बाद बाकी 6–7 बच्चों तक यह तेजी से फैल जाता है और मृत्यु दर भी काफी अधिक रहती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
पार्वो एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से 6 सप्ताह से 6 महीने तक के पिल्लों को प्रभावित करती है. यह वायरस आंतों और अस्थि मज्जा पर हमला करता है जिससे तेज बुखार, झागदार उल्टी, पतले या खूनी दस्त, सुस्ती और गंभीर डिहाइड्रेशन हो जाता है.
संक्रमण संक्रमित मल, उल्टी, दूषित बर्तन, बिस्तर या जमीन के संपर्क से फैलता है. खास बात यह है कि यह वायरस महीनों तक वातावरण में जीवित रह सकता है. कई बार तीन साल तक के बड़े कुत्ते भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. इलाज संभव है लेकिन यह लंबा और महंगा साबित हो सकता है.
डॉ. भारती ने बताया कि कई लोग यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि कुत्ते को सिर्फ रेबीज का टीका लगवाना ही पर्याप्त है जबकि पार्वो से बचाव के लिए 30 दिन की उम्र में पहला टीकाकरण और चार सप्ताह बाद बूस्टर डोज अनिवार्य है. 6 से 16 सप्ताह की उम्र के बीच नियमित अंतराल पर वैक्सीनेशन से इस बीमारी को पूरी तरह रोका जा सकता है. यदि समय पर टीका लग गया तो पार्वो होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है.
विशेषज्ञों की सलाह है कि पिल्लों को भीड़भाड़ या संक्रमित जगहों से दूर रखें. उनके रहने की जगह, बर्तन और खिलौनों को ब्लीच के घोल से नियमित साफ करें. बाहर से आने के बाद पंजों की सफाई करें और बीमार कुत्तों को तुरंत अलग रखें. हल्का और पौष्टिक भोजन जैसे दलिया, उबले आलू, पनीर या मां का दूध उनकी इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यदि उल्टी, दस्त या सुस्ती जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो सकती है.