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Benefits of Mandua Roti: मडुवा की रोटी पौष्टिकता से भरपूर होती है, और खासकर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में यह पारंपरिक आहार के रूप में खाई जाती है. मडुवे की रोटी बनाने की आसान विधि से घर पर यह स्वादिष्ट और सेहतमंद रोटी बनाई जा सकती है.
बागेश्वर: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मंडुवा की रोटी विशेष स्थान रखती है. यह पारंपरिक आहार सदियों से पहाड़ी परिवारों में स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में खाई जाती है. मंडुवा की रोटी मुख्य रूप से मंडुवा (ब्रोकली के बीज) के आटे से बनती है. जो आयरन, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है. इसकी पौष्टिकता के कारण इसे सभी उम्र के लोगों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है. विशेषकर ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों में यह शरीर को गर्म रखने और पाचन शक्ति मजबूत करने में सहायक मानी जाती है. अब इसे घर पर चुटकियों में बनाया जा सकता है.

अगर आपके पास ताजा मंडुवा का आटा उपलब्ध नहीं है. तो आप मंडुवा के दाने को घर पर भी पीस सकते हैं. इसके लिए मंडुवा के बीज को अच्छी तरह से साफ करके सुखा लें, और फिर अच्छी ग्राइंडर में पीसकर आटा बना लें. मंडुवा का आटा मिलने पर उसे उपयोग करने से पहले छलनी से छान लें ताकि उसमें छोटे-छोटे कण न रहें. ऐसा करने से रोटी बेलने में आसानी होती है, और रोटी पतली व फूली बनती है. इस आटे में आयरन, प्रोटीन, विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं.

मंडुवा की रोटी बनाने के लिए मंडुवा के आटे में हल्का नमक डालें और धीरे-धीरे पानी मिलाकर गूंधना शुरू करें. ध्यान रखें कि आटा न बहुत सख्त हो और न बहुत नरम. ऐसा गूंधें कि वह बेलने लायक मजबूती के साथ नरम हो. एक अच्छा गूंधा आटा रोटी को पतला और फूला बनाने में मदद करता है. आटे को लगभग 10-15 मिनट के लिए ढककर रखें ताकि वह अच्छी तरह से सेट हो जाए. इससे रोटी का स्वाद भी बेहतर होता है, और उसे बेलते समय टूटने की समस्या नहीं आती.

आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और बेलन की सहायता से उन्हें पतली और गोल आकार में बेलें. तवा पहले से अच्छी तरह गरम करें. रोटी को गरम तवे पर डालें और दोनों तरफ से समान रूप से सेकें. बीच-बीच में रोटी को पलटते रहें ताकि दोनों तरफ से अच्छी तरह पक जाए. जब रोटी में हल्की-हल्की बुलबुले बनने लगें और सुनहरी रंगत आ जाए, तो समझिए रोटी पूरी तरह से तैयार है.

मंडुवा की रोटी में आयरन, प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं. यह पाचन शक्ति को मजबूत बनाती है. शरीर में ऊर्जा प्रदान करती है और लोहे की कमी जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है. विशेष रूप से छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, वृद्ध लोग और शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति इसे नियमित रूप से खा सकते हैं. यह रोटी बिना तेल-मसाले के भी स्वादिष्ट बनती है. जिससे सेहत का पूरा ध्यान रखा जा सकता है.

मंडुवा की रोटी बनाने की पारंपरिक विधि बहुत सरल है. मंडुवा का आटा, हल्का नमक, पानी और एक गर्म तवा—बस इतनी सामग्री की जरूरत होती है. इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. पारंपरिक तरीके से घर पर मंडुवे की रोटी बनाना बहुत आसान हो गया है. आप चाहें तो इसमें थोडा घी डालकर स्वाद बढ़ा सकते हैं. इससे न केवल उत्तराखंड की परंपरा जगेगी, बल्कि स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हुए स्वादिष्ट भोजन का आनंद भी लिया जा सकता है.

मंडुवा की रोटी बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि यह पाचन में आसान होती है. उसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. वृद्ध लोगों के लिए भी यह हल्की होती है और शरीर को आवश्यक पोषण देती है. आयरन की प्रचुरता से रक्त निर्माण में मदद मिलती है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह रोटी फायदेमंद होती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं. इसे खाने से शरीर को प्राकृतिक ताकत मिलती है.

मंडुवा की रोटी को आप दही, घर पर बनी हरी चटनी, अचार, मक्खन, सरसों का साग, या आलू की सब्जी के साथ परोस सकते हैं. यह रोटी खाने में हल्की और सुपाच्य होती है. विशेष रूप से सुबह के नाश्ते या शाम के हल्के भोजन में इसे शामिल किया जाता है. उत्तराखंड के लोकजीवन में मंडुवा की रोटी का स्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पूरे दिन की ऊर्जा प्रदान करती है.