Mahakaleshwar Jyotirlinga 14 March 2026 Darshan: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जहां हर रोज होने वाली आरती का खास आध्यात्मिक महत्व है. 14 मार्च 2026 शनिवार का दिन महाकाल की दिव्य आरती के दर्शन श्रद्धालु घर बैठे लाइव प्रसारण के जरिए देख सकते हैं.
शनिवार का दिन भगवान शिव की उपासना और शनि देव की पूजा के लिए काफी शुभ माना जाता है, जिस वजह इस दिन महाकाल आरती का महत्व और अधिक बढ़ जाता है.
श्रद्धालु नियमित रूप से लाइव आरती देख सकते हैं!
श्रद्धालु भगवान महाकाल की आरती का लाइव प्रसारण मंदिर के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल Mahakal Live Darshan Official पर देख सकते हैं. रोजाना सुबह होने वाली सुप्रसिद्ध भस्म आरती से लेकर शाम की आरती तक का लुफ्त उठा सकते हैं.
लाइव प्रसारण के जरिए से भक्त अपने घर से ही बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना और आरती में भावनात्मक रूप से शामिल हो सकते हैं.
महाकाल की आरती का विशेष महत्व
उज्जैन के महाकाल मंदिर में होने वाली आरती का खास महत्व होता है. सबसे पहले भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, इसके बाद मंदिर के पुजारी मंत्रोच्चार और वैदिक विधि से उनकी आरती की जाती है. आरती के दौरान मंदिर परिसर में गूंजने वाले शंख, घंटा और डमरू की ध्वनि वातावरण को शुद्ध और पवित्र कर देती है.
शनिवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से बाधा दूर होने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है. इसलिए जो श्रद्धालु उज्जैन नहीं पहुंच पाते हैं, वे महाकाल की लाइव आरती में शामिल होकर भी इसका लाभ ले सकते हैं.
महाकाल की आरती का यह लाइव दर्शन श्रद्धालुओं को भगवान शिव के प्रति आत्मिक जुड़ाव का अनुभव कराता है, जहां वे अपनी श्रद्धा और आस्था के जरिए बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
बाबा महाकाल आरती
जय महाकाल जय महाकाल,
जय महाकाल जय महाकाल।
जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा,
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा।
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे।
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।
अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी,
चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी।
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे,
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे।
कर में त्रिशूल चक्र खड्ग परशु धारी,
जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकारी।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका।
लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा,
पार्वती अर्द्धांगी शिवलहरी गंगा।
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