रविवार, 18 जनवरी को माघ महीने की अमावस्या है। इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। जब अमावस्या रविवार को पड़ती है, तो इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन विशेष रूप से पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, धूप-ध्यान, दान-पुण्य और नदी स्नान करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, मान्यता है कि माघी अमावस्या पर ब्रह्मा जी के मानस पुत्र मनु ऋषि ने मौन रहकर तप किया था, इस वजह से इस अमावस्या का नाम मौनी अमावस्या पड़ा। इस दिन अपने पूर्वजों यानी पितरों के लिए किए गए श्राद्ध-तर्पण और धूप-ध्यान से उन्हें तृप्ति मिलती है। पितर देवता प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं, जिससे घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है। माना जाता है कि मौन रहने से मन की नकारात्मकता दूर होती है और मन शांत होता है। पितरों को भी पूजनीय माना जाता है। अगर कुटुंब के पितर असंतुष्ट हैं, तो परिवार के लोगों के जीवन में बाधाएं, रोग और अशांति बनी रहती है। मौनी अमावस्या पर धूप-ध्यान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितर देव प्रसन्न होते हैं, कुंडली के पितृ दोष शांत होता है। पितरों की कृपा से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। ये है पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की विधि .