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बिहार के छपरा जिले में किसान अब खेती के साथ पशुपालन और पोल्ट्री को जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. मांझी प्रखंड के कलान बाजार निवासी किसान मोहम्मद इसाक अंसारी भी इसी मॉडल को अपनाकर मुर्गी पालन से तिहरी कमाई कर रहे हैं. वे अपने खेत में जाली से घेरकर सोनाली और FFG2 नस्ल की मुर्गियों का पालन करते हैं, जिससे उन्हें अंडा, चूजा और तैयार मुर्गा बेचकर अलग-अलग तरीके से आय मिलती है. कम लागत और खुले में चरने की व्यवस्था के कारण चारे पर खर्च भी कम आता है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. रिपोर्ट- विशाल कुमार
छपरा के किसान नगदी फसल खेती करने के साथ-साथ अच्छे नस्ल के मुर्गी मुर्गा पालन करके डबल ट्रिपल कमाई कर रहे हैं. आज हम एक ऐसे किसान के संबंध में बताने जा रहे हैं. जो खास नस्ल के मुर्गी और मुर्गा पालन करके तीन तरह से कमाई करते हैं.
हम बात कर रहे हैं मांझी प्रखंड के कलान बाजार निवासी मोहम्मद इसाक अंसारी की, इनका मुर्गा मुर्गी कम खर्चे में पालन करने की आईडिया काफी खास है. इन्होंने अपने खेत में जालीं से घेरकर एक छोटा सा पलानी बनाकर मुर्गा मुर्गी पालन करते हैं.
जब मौसम खराब होता है या रात होता हैं तो मुर्गा मुर्गी अंदर रहती है. बाकी समय बाउंड्री के अंदर जालीं से घिरे हुए क्षेत्र में खुद से चारा खाती है. जिसके वजह से चारा का भी पैसा कम लगता है. चारा कम देना पड़ता है. दिन भर खुला में चरती रहती है. जिससे दाना पर खर्च कम आता है.
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मोहम्मद इसाक अंसारी के द्वारा दो नस्ल की मुर्गी पालन किया गया है. सोनाली और FFG2 नस्ल कों छपरा के वातावरण में काफी आसानी से इसको पाला जा सकता है.
इन दोनों नस्ल से अंडा बच्चा और फिर मुर्गा तैयार करके बेचकर किसान तीन तरह से कमाई करते हैं. यह मुर्गी अंडा भी देती है फिर बच्चा भी तैयार करती है और मुर्गा तैयार होने पर भी बेचकर किसान कमाई करते हैं.
पिछले 9 वर्षों से मुर्गी मुर्गा पालन कर रहे हैं. पहले फार्म के उजला मुर्गा पालन करते थे. जिसमें खर्च ज्यादा होता था और नुकसान बहुत ज्यादा हुआ करता था. लेकिन 1 वर्ष से देसी नस्ल को पालन कर रहे हैं. जिसमें अच्छा लाभ मिल रहा है. खुद से हेचरी तैयार करके बच्चा भी तैयार करते हैं, और अंडा भी बेचते हैं. मुर्गा तैयार होने पर मुर्गा को भी बेचते हैं.
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