Love Story:लेनिन की जिंदगी में ‘पति, पत्नी और वो’ का ट्रेंगल, बीवी की ही दोस्त

लेनिन के निधन से ठीक एक साल पहले एक किताब प्रकाशित हुई. जिसके छपते ही तहलका मच गया. दरअसल ये किताब लेनिन के एक्स्ट्रा मेरिटल रिलेशनशिप पर थी.  ये पत्नी के अलावा एक अन्य महिला के साथ उनके तीव्र प्रेम संबंधों की कहानी कहती थी. लेनिन की इस लव स्टोरी की चर्चा आज भी रहती है. वह भी एक कम्युनिस्ट थीं. लेनिन की पत्नी की बहुत अच्छी दोस्त. सोवियत क्रांति के दिनों उन्होंने मिलकर साथ में काम किया था. ये भी कहा जाता है कि इस ट्राएंगल लव स्टोरी के बारे में लेनिन की पत्नी भी सबकुछ जानती थीं.

लेनिन 1870 को सिंविर्स्क नामक जगह पर एक समृद्ध परिवार में पैदा हुए थे. वह 1917 से 1924 तक सोवियत रूस और 1922 से 1924 तक सोवियत संघ के भी “हेड ऑफ़ गवर्नमेंट” रहे. उनके जीवन की कहानी विचित्र थी. उन्होंने अपने जीवन में दो महिलाओं से प्यार किया. एक उनकी पत्नी बनीं और दूसरी ताजिंदगी संगिनी रहीं. इन तीनों के बीच अजीब सा रिश्ता रहा.

सबसे पहले उनकी पत्नी की बात करते है. उनका नाम था नादेज्दा क्रुप्सकाया. संगिनी या मिस्ट्रेस का नाम था इनेसा अर्मां, वो फ्रेंच-रूसी कम्युनिस्ट थीं. इन दोनों महिलाओं में काफी प्रतिद्वंद्विता थी और दोस्ती भी. इन तीनों के बीच ताजिंदगी संबंध बने रहे.

12 अक्टूबर 1920 को जब लेनिन की इस अभिन्न दोस्त, प्रेमिका, संगिनी अर्मां का निधन हुआ तो वह विचलित हुए. सोवियत साइट “रसियन बियांड” ने इस बारे में एक विस्तृत आर्टिकल में तत्कालीन क्रांतिकारी और लेनिन की सहयोगी अलेक्जेंडर कोलांताई को उद्धृत करते हुए लिखा, “शवयात्रा में लेनिन हमारे साथ चल रहे थे. उन्होंने अपनी आंखें बंद की हुईं थीं. उन्हें संभालना पड़ रहा था.” बाद में कोलंतई ने इस पर एक किताब भी लिखी, जिसका नाम था “ए ग्रेट लव”. जिसमें लेनिन के जीवन के प्रेम त्रिकोण का विस्तार से वर्णन किया गया है.
लेनिन की जिंदगी में उनकी पत्नी के अलावा एक अभिन्न प्रेमिका भी थीं, जिनके साथ उनके रिश्ता हमेशा बने रहे. माना जाता है कि उनकी पत्नी को भी इस रिश्ते से कोई दिक्कत नहीं थी

प्रेमिका के निधन पर बिखर गए लेनिन

निधन से पहले अर्मां कई हफ्ते बीमार रहीं. फिर अचानक उनकी मृत्यु हो गईं. जिस जगह नालचिक में उनकी मृत्यु हुई, वो मास्को से 850मील दूर था. जब ये खबर लेनिन के पास आई तो वो बिखर ही गए.
लेनिन की पत्नी क्रुप्सकाया ने इसके बाद लिखा, मैं डर रही थी कि उसकी मौत पर लेनिन ना जाने क्या कर ले. वो रो रहा था और उसकी आंखें शून्य में इस तरह टंगीं थीं, मानों वो मीलों दूर देख रहा हो.

प्रेमिका अर्मां की कहानी

इनेस अर्मां की मां अंग्रेज और पिता फ्रेंच थे. वो रंगकर्मी थे और थिएटर के लिए रूस जा बसे थे. उसका विवाह एक संपन्न परिवार में हुआ. उसके पति का नाम अलेक्जेंडर था. उससे पांच बच्चे हुए. बाद में उसको अपने देवर से प्रेम हो गया. अपने बच्चों के साथ वो देवर के घर पर रहने लगी. पति ने फिर भी आर्थिक मदद देनी जारी रखी.

लेनिन की बीवी भी उसे पसंद करती थीं

इसके बाद वो धीरे धीरे राजनीति में सक्रिय होती गई. जब उसे निर्वासित कर दिया गया तो वो लेनिन के संपर्क में आई. पुलिस और दूसरे भी उसे लेनिन की मिस्ट्रेस समझते. वह लेनिन के बहुत निकट रही. ये बात क्रुप्सकाया मालूम थी. वो खुद उसको बहुत पसंद करती थी.

इनेसा अर्मां से लेनिन की मुलाकात निर्वासन के दौरान हुई थी. हालांकि तब तक लेनिन की शादी को 11 साल बीत चले थे

“द ग्रेट लव” में लिखा है कि एक बार लेनिन की पत्नी ने जान-बूझकर अर्मां और लेनिन को करीब एक हफ्ते तक साथ साथ रहने दिया. इनेसा अर्मां की जीवनी लिखने वाले जां क्रेविल से अनुसार, “उसमें बुद्धिमत्ता और असाधारण सौंदर्य था. साथ ही ऊर्जा, नारी सुलभ गुणों के साथ व्यावहार बुद्धि और क्रांतिकारी आवेग का अद्भुत समन्यव था. ऐसे शख्स के सम्मोहन से कौन बच सकता था.”

बाद के दिनों में मिलना कम हो गया

हालांकि बाद के दिनों में लेनिन और उसका मिलना कम होता गया. जब इनेसा बीमार हुई तो उसे क्रीमिया उपचार पर भेजने का इंतजाम खुद लेनिन ने किया था. उसके अंतिम संस्कार में आखिरी वक्त लेनिन अघोषित तौर पर पहुंचे थे. “ए ग्रेट लव” की लेखिका कौंतलाई के अनुसार उन्होंने चेहरा छिपा रखा था ताकि कोई उनके दुख को देख नहीं पाए.

लेनिन की बीवी क्रुप्सकाया को लेनिन के साथ अर्मां के संबंधों के बारे में मालूम था. लेकिन उन्होंने इसको स्वीकार कर लिया था. ये भी कहा जाता है कि वो खुद इनेसा अर्मां को कुछ मामलों में पसंद करती थीं

कब हुई लेनिन से पहली मुलाकात

अर्मां की पहली लेनिन से पहले मुलाकात 1909 में हुई थी. इसके बाद दोनों को पेरिस में साथ रहने और काम करने का मौका मिला. जो उनके बारे में जानता था, उसका यही कहना था कि उनके रिश्ते दोस्ती से कहीं ज्यादा गहरे थे.लेनिन बुरी तरह उस पर फिदा थे. अर्मां उन्हें लगातार लेटर लिखती थीं. जिसमें वो लेनिन के प्रति अपने प्यार को जाहिर करती रहती थीं.

लेनिन की पत्नी का रोल

अर्मां से मिलने से पहले ही लेनिन की शादी नेदेज्दा क्रुप्सकाया से हुए 11 साल बीत चुके थे. वो समर्पित क्रांतिकारी होने के साथ लेनिन की बेहद विश्वासपात्र सहयोगी थीं. साथ ही उतनी बेहतरीन पत्नी भी. हालांकि अक्सर वो अर्मां के लेनिन की जिंदगी में आने से अपसेट भी होती थीं. नाराज हो जाती थीं लेकिन इन दोनों महिलाओं में बाद में एक अच्छी दोस्ती भी विकसित हो गई थी.

ताब ए ग्रेट लव में लिखा है कि जब इनेसा अर्मां का निधन हुआ तो लेनिन अंतिम समय में अंतिम संस्कार में पहुंचे. उन्होंने अपना चेहरा छिपाया हुआ था ताकि किसी को ये पता नहीं चले कि वो किस कदर दुखी हैं

लेनिन ने रूसी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी. 1917 में उनके नेतृत्व में रूसी क्रांति ने सिर उठाया. इसके कारण 1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई. समाज और दर्शनशास्त्र को लेकर लेनिन के मार्क्सवादी विचारों ने रूस ही नहीं दुनिया भर को प्रभावित किया. उनकी इस विचारधारा को लेनिनवाद के नाम से जाना जाता है.

1924 में लेनिन का निधन

लंबी बीमारी के बाद 21 जनवरी 1924 को दिल का दौरा पड़ने से लेनिन की मौत हो गई. उनकी मृत्यु पर उनके सम्मान में रूस के पश्चिमी तटवर्ती इलाके सेंट पीटर्सबर्ग का नाम बदल कर लेनिनग्राद कर दिया गया. हालांकि रूस में कई लोग शहर के कम्युनिस्ट नाम से सहमत नहीं थे. इसलिए 1991 में इसे दोबारा बदल कर सेंट पीटर्सबर्ग कर दिया गया.

किताब पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई

लेनिन की मृत्यु के सालभर पहले 1923 में इस त्रिकोण प्रेम पर आधारित किताब का प्रकाशन लेखिका अलेक्जेंड्रा कोलंताई ने नार्वे में किया. जहां वो सोवियत संघ से निर्वासित किए जाने के बाद रह रही थीं. इस किताब के आने के बाद सोवियत संघ में तहलका मच गया.

लेनिन की इस प्रेम कहानी के बारे में उनके सभी सहयोगियों को मालूम था लेकिन सभी इस पर चुप्पी साधे रहते थे. किताब में इस पूरी कहानी के प्रकाशन पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई. उस समय तक सोवियत संघ पर स्तालिन का शिकंजा कस चुका है. बल्कि उन्होंने इस किताब को आधार बनाते हुए बूढ़ी हो चुकी लेनिन की बीवी क्रुप्सकाया पर ही निशाना साधा.

बाद में लेनिन की बीवी को स्तालिन ने किनारे कर दिया

लेनिन की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी नादेज्दा क्रुप्सकाया का जीवन काफी संघर्षपूर्ण और अपमानजनक रहा. लेनिन की मृत्यु से पहले ही स्तालिन ने क्रुप्सकाया के साथ बदतमीजी की थी. लेनिन ने अपनी वसीयत में इसका जिक्र भी किया था. लेनिन के जाने के बाद स्तालिन ने क्रुप्सकाया को राजनीतिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया.

तमाम अपमान के बावजूद वह सोवियत संघ की शिक्षा उप-मंत्री के रूप में काम करती रहीं. उन्होंने रूस में पुस्तकालयों और साक्षरता अभियान में बहुत बड़ा योगदान दिया. वह वे अंत तक कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य बनी रहीं, लेकिन उनके पास कोई वास्तविक शक्ति नहीं थी.

1939 में उनके 70वें जन्मदिन के अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई. कहा जाता है कि उन्होंने स्तालिन द्वारा भेजा गया ‘केक’ खाया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई. कई इतिहासकारों का मानना है कि स्तालिन ने उन्हें जहर देकर मरवा दिया था.

क्रुप्सकाया ने लेनिन की मृत्यु के बाद के 15 साल बहुत कठिन परिस्थितियों में बिताए. उन्हें न केवल अपने पति को खोने का गम था, बल्कि उन्हें उस पार्टी द्वारा भी दरकिनार कर दिया गया जिसे खड़ा करने में उन्होंने अपना जीवन लगा दिया था.

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