लॉन्ग वर्किंग आवर्स और देर तक जागने की मजबूरी, जानें दिल के लिए यह कितना खतरनाक?

Can Long Working Hours Cause Heart Attack: आज की हमेशा काम में व्यस्त का कल्चर में देर रात तक जागना और लंबे घंटे काम करना कई लोगों के लिए उपलब्धि का प्रतीक बन गया है. लेकिन इस भागदौड़ के पीछे एक खामोश खतरा पनप रहा है. हालिया रिसर्च बताते हैं कि अनियमित नींद और 55 घंटे या उससे ज्यादा काम करना सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हार्ट पर गंभीर दबाव भी डालता है.

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, लंबे समय तक काम करना, नाइट शिफ्ट और अनरेगुलर शेड्यूल हार्ट रोग के बड़े जोखिम कारणों में से हैं. डब्लूएचओ और आईएलओ के संयुक्त एनालिसिस में पाया गया कि 2016 में लंबे कार्य घंटों से जुड़े कारणों से लाखों लोगों की मौत हार्ट रोग और स्ट्रोक से हुई. जो लोग सप्ताह में 55 घंटे या उससे अधिक काम करते हैं, उनमें 35 से 40 घंटे काम करने वालों की तुलना में जोखिम काफी ज्यादा पाया गया.

एक्सपर्ट बताते हैं कि नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि वह समय है जब हार्ट और ब्लड वेसल्स खुद को दुरुस्त करती हैं. लगातार कम नींद लेने से सूजन बढ़ती है, आर्टरीज में प्लाक जमने का खतरा बढ़ता है और ब्लड शुगर व मेटाबॉलिज्म गड़बड़ा सकते हैं. इससे मोटापा और डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ता है, जो हार्ट की बीमारी के बड़े कारण है.

नाइट शिफ्ट से क्या होती है दिक्कत?

हमारा शरीर 24 घंटे की सर्कैडियन रिद्म, पर चलता है, नाइट शिफ्ट या अनरेगुलर सोने-जागने का समय इस तालमेल को बिगाड़ देता है. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के सपोर्ट में हुए रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों की नींद का समय बेहद अनियमित होता है, उनमें हार्ट रोग का खतरा लगभग दोगुना हो सकता है. नींद बिगड़ने पर ब्लड प्रेशर बढ़ता है, कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन बढ़ते हैं, सूजन बढ़ती है और कोलेस्ट्रॉल व शुगर नियंत्रण बिगड़ता है, ये सब हार्ट पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं.

क्या होते हैं लक्षण?

एक्सपर्ट के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लगातार 6 से 7 घंटे से कम सोता है, तो शरीर तनाव की स्थिति में रहता है. इससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ते हैं और लंबे समय में दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. कुछ शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है, जिसमें आराम की स्थिति में भी हाई ब्लड प्रेशर, सीने में असहजता या धड़कन का तेज होना, हल्की मेहनत में सांस फूलना, लगातार थकान या दिनभर सुस्ती. ऐसे लक्षण बार-बार दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

आापको क्या करना चाहिए?

हार्ट को सुरक्षित रखने के लिए रोज 7 से 9 घंटे की क्वालिटी वाली नींद लेने की कोशिश करें. रेगुलर सोने-जागने का समय रखें, रात में भारी भोजन और स्क्रीन टाइम कम करें. नाइट शिफ्ट हो तो भी भोजन, व्यायाम और आराम का समय तय रखें. दिन में हल्की-फुल्की गतिविधि या टहलना व्लड फ्लो को बेहतर बनाता है. शराब और ज्यादा कैफीन से बचें, योग या ध्यान से तनाव कम करें. साथ ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की नियमित जांच करवाते रहें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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