मुंबई में केरल का तड़का… ओणम थाली में 26 पकवान, रेस्टोरेंट में लगी लंबी कतार

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Mumbai Famous Food: मुंबई के कामत्स लेगेसी में ओणम साध्या थाली परोसी जा रही है जिसमें 26 प्रकार के व्यंजन हैं. यह परंपरा राजा महाबली से जुड़ी है और केरल की संस्कृति दर्शाती है.

मुंबई. भारत अनेकों राज्य और तरह-तरह की संस्कृति का देश है. यहां हर राज्य में अलग परम्परा और त्योहार देखने को मिलते हैं. ऐसा ही एक अनोखा त्योहार दक्षिण भारत के राज्य केरल में मनाया जाता है, जिसे ओणम कहा जाता है. यह त्योहार खास तौर पर ओणम साध्या के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें एक थाली में 26 प्रकार के भोजन परोसे जाते हैं.

इस भोजन की तैयारियां ओणम से कुछ दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं. मुंबई में मीरा रोड स्थित कामत्स लेगेसी नामक दक्षिण भारतीय रेस्टोरेंट में अभी से ओणम की झलक देखने को मिल रही है. हालांकि ओणम 5 सितंबर को है, लेकिन यहां ओणम साध्या थाली परोसी जा रही है, जिसे खाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है. एक थाली की कीमत 899 रुपये है और इसमें आप जितना चाहे उतना खा सकते हैं.

26 प्रकार के आइटम एक थाली में
रेस्टोरेंट के मैनेजर ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मुंबई में रहने वाले दक्षिण भारतीय लोगों को यहां घर जैसा माहौल मिलता है. ओणम साध्या की थाली केले के पत्ते पर सजाई जाती है, जिसमें पूरे 26 प्रकार के व्यंजन शामिल होते हैं. इसमें 2 तरह के चावल, रसम, सांबर, थोरन, पुलिंजी, ओलन और अवियल जैसे व्यंजन होते हैं. इसके अलावा कुल 8 प्रकार की सब्जियां भी परोसी जाती हैं. इस पूरे भोजन को पूरी तरह दक्षिण भारतीय शैली में तैयार किया जाता है.

ओणम साध्या का इतिहास
ओणम साध्या की उत्पत्ति राजा महाबली से जुड़ी हुई है. उनके शासनकाल को समृद्धि और समानता का स्वर्णिम युग माना जाता था. ओणम के दौरान राजा के स्वागत के लिए केरलवासियों ने प्रचुरता और कृतज्ञता का प्रतीक एक भव्य शाकाहारी भोजन तैयार किया था. यही परंपरा आज भी जारी है, जो साध्या को ओणम उत्सव का अभिन्न अंग बनाती है. इस साध्या के हर व्यंजन का अपना महत्व है. इसमें तीखे पुलिसेरी और सांबर से लेकर मीठे पायसम तक शामिल होता है, जो इस पर्व को संपूर्णता प्रदान करता है. स्वाद और विविधता का यह संगम केरल की पाक-समृद्धि को दर्शाता है. मुंबई के कई हिस्सों में भी इन दिनों केरल जैसा वातावरण देखने को मिल रहा है.

Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल… और पढ़ें

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