लोको पायलट पाइल्स सर्जरी मामला: बवासीर के ऑपरेशन के बाद कितने दिन में रिकवर होता है मरीज?

Piles Surgery News: हाल ही में लखनऊ से वायरल हुए एक लोको पायलट के वीडियो ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी थी. पाइल्स सर्जरी के बाद रेलवे के लोके पायलट ने और सिक लीव बढ़ाने के लिए अप्लाई किया था, लेकिन अधिकारी ने उसकी बात पर भरोसा नहीं किया तब लोको पायलट राजेश मीणा को अपना पेंट उतारकर अधिकारी को अपने घाव दिखाने पड़े. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने अधिकारी के अमानवीय रवैये की आलोचना की वहीं कर्मचारी यूनियन ने भी कड़ा विरोध जताते हुए कर्मचारी को छुट्टी देने की मांग की, तब कहीं जाकर उसे छुट्टी मिली.

बवासीर की सर्जरी को लेकर यह घटना भले ही पहली बार वायरल हुई है लेकिन डॉक्टरों की मानें तो पाइल्स की सर्जरी को लेकर लोग अक्सर इसी भ्रम में रहते हैं कि यह एक सामान्य सा इलाज है और इसके लिए ज्यादा आराम करने की जरूरत नहीं होगी. जबकि मरीज ही जान सकता है कि उसे कितनी तकलीफ होती है.

इस बारे में पिछले कई दशकों से पाइल्स का इलाज और सर्जरी कर रहे पाइल्स क्लीनिक नई दिल्ली के एनो रेक्टल सर्जन डॉ. प्रभाकर सिंह से ऐसे कई सवालों के जवाब जानते हैं कि पाइल्स की सर्जरी कितने तरह की होती हैं? सर्जरी के बाद मरीज को ठीक होने में कितना समय लगता है? क्या सर्जरी के आठ दिन बाद मरीज ड्राइविंग या सिटिंग जॉब करने की स्थिति में होता है?

पाइल्स की सर्जरी के बाद कितने दिन का आराम जरूरी है?
पाइल्स की सर्जरी के बाद रिकवर होने के लिए कम से कम कितने दिन आराम करना जरूरी है, यह निर्भर करता है कि उसके इलाज में कौन सा प्रॉसीजर अपनाया गया है. अगर किसी मरीज की सर्जरी हुई है तो कम से कम 15 दिन और अधिकतम एक महीने तक भी आराम करने की सलाह दी जाती है. यह देखा जाता है कि उस मरीज की हीलिंग कैपेसिटी कितनी है. सबसे पहले तो मरीज को कम से दो हफ्ते आराम करना चाहिए, उसके बाद डॉक्टर उसकी हालत देखकर आगे इसे बढ़ाने का फैसला कर सकता है.

इस बीमारी में कितने तरह की सर्जरी की जाती हैं?
यह सिर्फ पाइल्स तक सीमित नहीं है, इससे मिली-जुली कई बीमारियां होती हैं जैसे बवासीर, फिशर, फिस्टुला यानि भगंदर, रैक्टल प्रोलैप्स आदि बीमारियों को मिलाकर करीब 10 से 12 तरह की सर्जरी की जाती हैं. ये सर्जरी दो तरह से की जाती हैं. पहली होती है ऐलोपैथी की सर्जरी. इनमें करीब 3 तरह की तकनीकों से सर्जरी होती है. जैसे क्रायोथेरेपी, ओपन हेमरॉयडेक्टमी, रबर बैंड लिगेशन, लेजर सर्जरी आदि. रबर बैंड लिगेशन कम चीर-फाड़ वाली सामान्य सर्जरी होती है जबकि बाकी इससे अलग होती हैं और लंबे समय तक आराम करना होता है.

दूसरी होती है आयुर्वेदिक सर्जरी, जिनमें क्षारसूत्र, क्षारकर्म, अग्निकर्म आदि कई चिकित्साएं हैं. इसके अनुसार अगर किसी ने आयुर्वेदिक इलाज कराया है तो उसे कम से कम 10 दिन से 15 दिन तक आराम करने की जरूरत होती है और ऐलोपैथी के इलाज में कम से कम 15 दिन से एक महीने तक आराम करना होता है.

सर्जरी के बाद क्या न करने की सलाह दी जाती है?
सर्जरी के बाद मरीजों को क्या करने और क्या न करने के लिए बताया जाता है. खासतौर पर पाइल्स या फिशर-फिस्टुला की सर्जरी के बाद मरीज को कम से कम बैठने और ड्राइविंग न करेन के लिए कहा जाता है. मरीज को चलने-फिरने, खड़े होने और लेटने की छूट रहती है लेकिन ज्यादा देर तक बैठने से उसे कई परेशानियां हो सकती हैं.

ज्यादा लंबे समय तक बैठने से मरीज को क्या दिक्कत होती है?
लॉन्ग सिटिंग से सर्जरी के बाद पाइल्स वाली जगह पर खून आ सकता है. मरीज की रिकवरी लेट हो सकती है और उसके आसपास के सेकेंडरी पाइल्स डेवलप होने की संभावना बढ़ जाती है. जिससे उसको फिर से उसको इलाज कराने के लिए आना पड़ेगा. यह शरीर का केंद्र बिंदु होता है और पूरे शरीर का वजन यहां आकर प्रेशर डालता है, इसलिए मरीज को आराम की सलाह दी जाती है. कई बार मरीजों को ब्लीडिंग होने लगती है तो उसे रीओपन करना पड़ जाता है.

इस मरीज के मामले में आप क्या कहेंगे?
पाइल्स सर्जरी जैसे मामलों में मरीज की स्थिति को देखना चाहिए, अधिकारियों को समझना चाहिए कि यह कोई सामान्य सर्जरी नहीं है बल्कि यह भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कोई और सर्जरी. अगर एक बार यह सर्जरी होती है तो इससे पूरे मरीज की लाइफस्टाइल पर असर पड़ता है. मूलबंद की सर्जरी का असर पूरी बॉडी पर पड़ता है.

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