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Liver Cirrhosis Symptoms: लिवर हमारे शरीर का वो इंजन है जो 500 से भी ज्यादा जरूरी काम करता है, लेकिन अगर लगातार आप अपनी लाइफस्टाइल को बिगाड़ लेंगे तो इससे लिवर सड़ने लगेगा. लिवर में जब सड़न बहुत ज्यादा हो जाएगी तो लिवर सिरोसिस की जानलेवा बीमारी हो सकती है. शुरुआत में लिवर सिरोसिस की बीमारी में बहुत मामूली संकेत दिखते हैं. ऐसे में यदि आप इन मामूली संकेतों को ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज करते जाए तो इससे बेहद मुश्किल स्थिति की सामना करना पड़ सकता है.
लिवर शरीर के 500 से भी ज्यादा कामों में अहम भूमिका निभाता है. इसलिए इसे शरीर की फैक्ट्री कहा जाता है. लिवर की सबसे खास बात यह है कि इसे डिटॉक्सिफिकेशन की जरूरत नहीं होती. यानी लिवर खुद को साफ करने वाला यानी सेल्फ डिटॉक्सिंग अंग है. इसलिए यह अपनी मरम्मत भी खुद कर लेता है लेकिन अगर लगातार आपका खराब खानपान हो तो इसकी वजह से अक्सर लिवर में फैट जमा हो जाता है, जो चिंता की बात है. इसे फैटी लिवर डिजीज कहते हैं. अगर इसे समय पर कंट्रोल नहीं किया गया तो यह खतरनाक भी हो सकता है और इससे लिवर सिरोसिस भी हो सकता है.

थकान और कमजोरी- लिवर सिरोसिस के शुरुआती लक्षणों में से एक है थकान और कमजोरी. इसमें शरीर में ताकत की भारी कमी महसूस होती है. जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो वह खून से विषाक्त पदार्थों को सही तरीके से नहीं निकाल पाता है. प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता और शरीर में पोषक तत्वों का चयापचय (Metabolism) बाधित हो जाता है. इसके कारण व्यक्ति को हर समय सुस्ती, मांसपेशियों में कमजोरी और गहरी थकावट महसूस होती है, जो पर्याप्त नींद लेने के बाद भी दूर नहीं होती. यह स्थिति दैनिक कार्यों को करने की क्षमता को भी प्रभावित करती है.

आंखों का पीला पड़ना-पीलिया या जॉन्डिस तब होता है जब लिवर खून से बिलीरुबिन नामक पीले पिग्मेंट को छानने में विफल रहता है. बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने से आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखने लगती है. इसके साथ ही पेशाब का रंग गहरा पीला या भूरा हो सकता है. यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है और वह अपनी सफाई करने में सक्षम नहीं है. यह लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर के पास जाना जरूरी है.
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पेट और पैरों में सूजन-जैसे-जैसे लिवर की बीमारी बढ़ती है, शरीर के टिशू में तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इस स्थिति में लिवर एल्ब्यूमिन प्रोटीन का उत्पादन कम करने लगता है जिससे पैरों और टखनों में सूजन आ जाती है. इसे एडेमा कहते हैं. इसके अलावा, पेट के हिस्से में तरल पदार्थ का जमा होना शुरू हो जाता है, जिसे जलोदर कहा जाता है. इससे पेट बहुत ज्यादा फूला हुआ और भारी महसूस होता है, जो सांस लेने में कठिनाई और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है.

खुजली और स्किन पर मकड़ी जैसे निशान-लिवर की खराबी के कारण पित्त खून में जमा होने लगता है, जिससे पूरे शरीर में स्किन खुजली हो सकती है. इसके अतिरिक्त, सिरोसिस के रोगियों में स्किन के ऊपरी हिस्से पर लाल, मकड़ी के जाले जैसी रक्त वाहिकाएं दिखाई देने लगती हैं, जो आमतौर पर चेहरे, गर्दन और छाती पर होती हैं. यह शरीर में हार्मोनल असंतुलन और रक्त संचार में बाधा के कारण होते हैं.

मानसिक भ्रम और एकाग्रता में कमी-जब लिवर खून से अमोनिया जैसे जहरीले पदार्थों को साफ नहीं कर पाता, तो ये टॉक्सिन्स मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं, जिसे हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी कहा जाता है. इसके कारण व्यक्ति को बात करने में लड़खड़ाहट, निर्णय लेने में कठिनाई, बहुत अधिक नींद आना या अचानक व्यवहार में बदलाव महसूस हो सकता है. गंभीर मामलों में, व्यक्ति पूरी तरह भ्रमित हो सकता है या उसकी याददाश्त कमजोर हो सकती है. यह लक्षण सिरोसिस के एडवांस स्टेज पर होने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत है.