आजीविका योजना से बदली किस्मत, बांस के बैग बनाकर सावित्री कमा रही ₹40 हजार महीना

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Ranchi Savitri Life Changed With Aajivika Didi Yojna: रांची की सावित्री ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और पढ़ाई जारी रखने के लिए आजीविका दीदी योजना का सहारा लिया. छह महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्होंने बांस के बैग, लैम्प और डेकोरेटिव आइटम्स बनाना सीखा और आज महीने में 30-40 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं. सावित्री न सिर्फ अपने घर के खर्च और भाई-बहनों की पढ़ाई संभाल रही हैं, बल्कि खुद रांची यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री भी कर रही हैं. रिपोर्ट- शिखा श्रेया

रांची की सावित्री आज अपने पैरों पर खड़ी हैं और खुद भी पढ़ाई करती हैं. सावित्री बताती हैं कि ‘एक समय था जब घर की हालत बहुत ही खराब थी. ऐसे में आजीविका दीदी योजना के तहत मैं जुड़ी और इससे मुझे लोन भी मिला और आज मैं बैग से लेकर डेकोरेटिव आइटम्स तक हर एक चीज बनाने का काम करती हूं.

मुझे मुफ्त में कई राज्यों में जाने का मौका मिलता है. वहां स्टॉल लगाने का मौका मिलता है. ऐसे में हमारे कस्टमर भी बनते चले जाते हैं. कस्टमर के लिए सोचना नहीं पड़ता. आज आलम यह है कि घर का खर्च से लेकर अपनी पढ़ाई और अपने भाई-बहनों की पढ़ाई, घर का राशन-पानी सब चलता है. मेरे पिताजी किसान हैं.’

सावित्री बताती हैं, ‘मेरे पिताजी किसान हैं और मम्मी घर का काम संभालती हैं. ऐसे में घर की आमदनी बस उतनी ही होती थी, जितने में हम दो वक्त रोटी अच्छी तरह खा लें, इससे अधिक नहीं.

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मेरे दो भाई-बहन भी हैं. ऐसे में किसी ने मुझे बताया कि ऐसी एक योजना चलती है, जिसके तहत जुड़कर आपको स्किल सिखाया जाएगा. वहां से जुड़कर कई सारी चीजें आप सीख सकती हैं और सरकार आपको सहयोग भी करेगी.

मुझे लगा कि अगर यह सहयोग मिल जाए तो मैं खुद की भी पढ़ाई करूं और भाई-बहनों का भी खर्च निकाल लूंगी और आज ऐसा ही हुआ. 6 महीने की ट्रेनिंग मिली, जिसके तहत कई सारी चीजें बनाना हमने सीखा. जैसे बांस का बैग, बांस का लैम्प, डेकोरेटिव आइटम्स, आर्टिफिशियल डेकोरेटिव आइटम्स. यह सारी चीजें आज मैं अपने हाथों से बनाती हूं.

साथ ही आज भाई-बहनों और घर की जिम्मेदारी मैं ही उठाती हूं. सबको अच्छे कॉलेज में पढ़ा रही हूं. मैं खुद रांची यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री कर रही हूं. क्लास भी हो जाती है और क्लास के बाद फिर दो से तीन घंटे बांस से कई चीजें बनाने में लग जाती हूं. ऐसे में दोनों ही काम साथ-साथ चलता है और आमदनी में महीने का आराम से 30 से 40 हजार रुपये के बीच हो जाती है. हमारे जैसे मिडिल क्लास परिवार के लिए इतना पैसा बहुत बड़ी बात है.’

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