हरिद्वार2 घंटे पहले
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शांत और स्थिर मन अत्यंत शुभ होता है। जैसे उबलते हुए जल में वाष्प और धुंध के कारण हमें अपनी छाया दिखाई नहीं देती, वैसे ही क्रोध के समय हमारी सही समझ नहीं बनती है। जब मन शांत और स्थिर होता है, तब हम स्वयं को स्पष्ट रूप से देख पाते हैं और सही निर्णय ले सकते हैं। क्रोध मन को विचलित कर देता है, जिससे विचार धुंधले हो जाते हैं और वास्तविकता समझ में नहीं आती। इसलिए आवश्यक यह है कि हम अपने मन को शांत रखें, ताकि हम सही दिशा में सोच सकें और अपने जीवन को संतुलित बना सकें।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हम किस वजह से खुद से दूर हो जाते हैं?
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