हरिद्वार18 मिनट पहले
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जीवन को संतुलित बनाने के लिए आत्म निरीक्षण करते रहना चाहिए। इससे हम अपनी कमियों को पहचान सकते हैं और उन्हें दूर कर सकते हैं। हमें अपने विचारों की निरंतर समीक्षा करनी चाहिए। अपने दोषों को समझकर उनसे दूर रहना ही समझदारी है। निराशा उत्पन्न करने वाली आदतों को त्याग कर सकारात्मकता अपनाएं। आत्म निरीक्षण शांति और सच्चे संतुलन का मार्ग है, जो जीवन को सार्थक और कल्याणकारी बनाता है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए विचारों में पवित्रता कैसे आ सकती है?
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