हरिद्वार9 घंटे पहले
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कई बार हमारी आलोचना सामने वाले की वास्तविकता नहीं, बल्कि हमारे पूर्वाग्रह, अपेक्षाएं और नकारात्मक सोच का परिणाम होती है। जब भी किसी में दोष दिखे, थोड़ी देर रुककर सोचें कि क्या हम पूरी परिस्थिति समझते हैं। हर व्यक्ति में कोई न कोई अच्छाई अवश्य होती है, उसे देखने का अभ्यास करें। साथ ही सहानुभूति रखें और खुद को उसकी स्थिति में रखकर विचार करें। नियमित आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच से धीरे-धीरे दूसरों की कमियों पर नहीं, बल्कि उनके गुणों पर ध्यान जाने लगता है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए दूसरों में दुर्गुण देखने की आदत कैसे छोड़ें?
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