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- Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. Don’t Keep Your Things Only For Yourself, Share Them With Other Needy People Too
हरिद्वार2 घंटे पहले
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हम व्यक्ति, वस्तु, पदार्थ, दृश्य और घटनाओं को भोगने की वृत्ति से बचें। जीवन में उपभोग नहीं, उपयोग की भावना होनी चाहिए। भोग आत्मकेंद्रित है, जबकि योग समर्पण का मार्ग है। जब हम सब कुछ केवल अपने लिए चाहते हैं, तो ये मेरा-मेरा की प्रवृत्ति है। शास्त्र कहते हैं- इदं न मम यानी ये सब सिर्फ मेरा नहीं है। महापुरुषों की शिक्षा है कि जो कुछ भी हमारे पास है, उसमें दूसरों का भी हिस्सा है। इसलिए जीवन में भोग करने की नहीं, बांटने की प्रवृत्ति अपनाएं। जीवन में भोग नहीं, सही उपयोग की भावना होनी चाहिए। अपनी चीजें केवल अपने लिए न रखें, उन्हें जरूरतमंद लोगों के साथ भी बांटें।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए अपनी चीजों का सही उपयोग कैसे कर सकते हैं?
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