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Sitamarhi Success Story : सीतामढ़ी के बाजपट्टी निवासी बी.टेक पास आईटी ट्रेनर सुधाकर कुमार की किस्मत लॉकडाउन में बदल गई. वह शिमला मिर्च, टमाटर, आम की ग्राफ्टिंग और नर्सरी से लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. वह ‘यशस्वी किसान सम्मान’ से भी सम्मानित किए जा चुके हैं.
सीतामढ़ी: बिहार में सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी के रहने वाले सुधाकर कुमार की कहानी आधुनिक भारत के बदलते स्वरूप की मिसाल है. बी.टेक (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग) करने के बाद सुधाकर आईटी इंडस्ट्री में बतौर कॉर्पोरेट ट्रेनर काम कर रहे थे. साथ ही 2017 से 2020 तक सफलतापूर्वक हॉस्टल का संचालन भी कर रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. माता की गंभीर बीमारी और रिटायर शिक्षक पिता अरुण कुमार सिंह के नर्सरी खोलने के पुराने शौक ने सुधाकर को वापस जड़ों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया. साल 2020 में जब लॉकडाउन लगा तो सुधाकर ने प्रधानमंत्री के ‘आपदा को अवसर’ में बदलने के आह्वान को गंभीरता से लिया. उन्होंने यूट्यूब के जरिए आधुनिक खेती की बारीकियां सीखीं और अपनी प्रोफेशनल स्किल्स को खेतों में झोंक दिया.
शिमला मिर्च और टमाटर की शुरू की खेती
सुधाकर की सफलता का सबसे बड़ा राज उनकी तकनीक और फसलों का चुनाव है. वे ड्रिप सिंचाई और आधुनिक बोर्डिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं, जिसके लिए उन्हें सरकार से सब्सिडी भी मिली है. वर्तमान में वे एक बीघा में सब्जियों की खेती कर रहे हैं, जिसमें शिमला मिर्च और टमाटर मुख्य है. वहीं, अगह हम आंकड़ों की बात करें तो शिमला मिर्च की खेती में मात्र 2,500 से 3,000 रुपये प्रति कट्ठा की लागत आती है. जबकि इससे होने वाली आमदनी 55000 रुपये प्रति कट्ठा तक पहुंच जाती है. इसी तरह टमाटर की खेती में 5,000 रुपये के निवेश पर वे 55 से 60 हजार रुपये कमा रहे हैं. उनकी कार्यकुशलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे मात्र डेढ़ महीने में पैदावार शुरू कर साढ़े चार महीने तक लगातार फसल प्राप्त करते हैं.
आम की ग्राफ्टिंग और नर्सरी से है लाखों की आय
सब्जियों के अलावा सुधाकर का मुख्य फोकस बागवानी और नर्सरी पर है. उनके पास 1.5 एकड़ में मालदह और बंबई जैसे उन्नत किस्म के आमों का बाग है. सुधांशु केवल फल ही नहीं बेचते हैं. बल्कि वे खुद आम की ग्राफ्टिंग (कलम बांधना) कर नर्सरी तैयार करते हैं. उनकी नर्सरी में फूलों से लेकर सब्जियों की हर वैरायटी उपलब्ध है. नर्सरी के व्यवसाय से वे हर सीजन में लगभग 3 लाख रुपये कमा लेते हैं. कुल मिलाकर, उनके पास 18 बीघा जमीन है, जिसमें से 13 बीघा में वे पारंपरिक खेती (धान-गेहूं) करते हैं और बाकी हिस्से में आधुनिक बागवानी करते हैं. आज वे खेती और नर्सरी के जरिए साल का 6 से 7 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.
खेती में निभाते हैं मास्टर ट्रेनर की भूमिका
महज 5 साल के छोटे से सफर में सुधाकर को उनकी मेहनत के लिए कई सम्मान मिल चुका है. उन्हें जिला स्तर पर 3 बार ‘यशस्वी किसान सम्मान’ से नवाजा जा चुका है. साल 2024 और 2025 में शिमला मिर्च की खेती के लिए उन्हें विशेष पुरस्कार मिला है. जबकि 2025 में गेंदा फूल की खेती के लिए उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया. वहीं, नींबू और आंवला उत्पादन में भी वह द्वितीय स्थान पर रहे हैं. आज सुधांशु केवल एक किसान नहीं, बल्कि एक ‘मास्टर ट्रेनर’ हैं. वह अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती और ड्रिप सिंचाई की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं. उनकी यह यात्रा साबित करती है कि यदि सही तकनीक और जज्बा हो, तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
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