दांतों की सेंसिटिविटी से मिल जाएगी मुक्ति, IISc के वैज्ञानिकों ने बनाए नैनोबोट्स, हमेशा के लिए दूर होगी परेशानी !

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Tooth Sensitivity New Treatment: बेंगलुरु IISc के वैज्ञानिकों ने ऐसे मैग्नेटिक नैनोबॉट्स तैयार किए हैं, जो दांतों की गहराई तक जाकर टूथ सेंसिटिविटी को खत्म कर देते हैं. यह तकनीक टीथ सेंसिटिविटी ट्रीटमेंट में क्र…और पढ़ें

दांतों की सेंसिटिविटी से मिल जाएगी मुक्ति, वैज्ञानिकों ने बनाए अनोखे नैनोबोट्सनैनोबॉट्स दांतों के ट्यूब्स में जाकर सेंसिटिविटी खत्म करते हैं.
Nanobots To Cure Tooth Sensitivity: कई लोगों को ठंडा या गर्म खाते वक्त दांतों में झनझनाहट और दर्द महसूस होता है. इसे आमतौर पर दांतों की सेंसिटिविटी (Tooth Sensitivity) कहा जाता है. जब आपके दांत के अंदर मौजूद डेंटिनल ट्यूब्यूल्स खुल जाते हैं, तब सेंसिटिविटी की समस्या होने लगती है. ये ट्यूब्यूल्स दांतों की नसों से जुड़े होते हैं. जब दांतों की ऊपरी परत एनेमल घिस जाती है, तो ये ट्यूब्यूल्स खुल जाते हैं और ठंडा या गर्म का असर सीधे नसों में पहुंचता है. इस समस्या से राहत पाने के लिए अभी तक सेंसिटिविटी टूथपेस्ट, जेल या वार्निश जैसे ट्रीटमेंट दिए जाते हैं. इनका असर कुछ दिनों तक रहता है और फिर परेशानी होने लगती है. रेयर मामलों में रूट कैनाल भी किया जाता है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने एक स्टार्टअप के साथ मिलकर मैग्नेटिक नैनोबॉट्स डेवलप किए हैं. इन नैनोबॉट्स का नाम CalBots रखा गया है. ये छोटे-छोटे नैनोबॉट्स 400 नैनोमीटर साइज के पार्टिकल्स होते हैं, जिन्हें मैग्नेटिक फील्ड की मदद से दांतों के भीतर मौजूद ट्यूब्यूल्स में गहराई तक भेजा जाता है. ये नैनोबॉट्स दांत के अंदर जाकर ट्यूब्यूल्स को अच्छी तरह बंद कर देते हैं और इससे सेंसिटिविटी की समस्या से छुटकारा मिल जाता है. इस सेंसिटिविटी का परमानेंट इलाज माना जा सकता है, क्योंकि एक बार यह ट्रीटमेंट कराने के बाद लंबे समय तक सेंसिटिविटी का खतरा नहीं रहता है.

कैसे काम करते हैं ये नैनोबॉट्स?

वैज्ञानिकों की मानें तो कैल्बॉट्स (CalBots) एक विशेष बायोसेरामिक सीमेंट से बने होते हैं, जो कैल्शियम सिलिकेट पर आधारित हैं. जब इन्हें दांत के प्रभावित हिस्से में मैग्नेटिक फील्ड के जरिए 20 मिनट तक रखा जाता है, तो ये नैनोबॉट्स धीरे-धीरे डेंटिनल ट्यूब्यूल्स के अंदर गहराई तक जाते हैं. ये नैनोबॉट्स लगभग 300 से 500 माइक्रोन तक की गहराई में चले जाते हैं. वहां जाकर ये अपने आप एक दूसरे से जुड़ जाते हैं और एक मजबूत सील बना देते हैं, जो ट्यूब्यूल्स को परमानेंट तरीके से से बंद कर देती है. इससे ठंडी या गर्म चीजों का असर नसों तक नहीं पहुंच पाता और सेंसिटिविटी खत्म हो जाती है.

इंसानी दांतों पर हो चुका एक्सपेरिमेंट

वैज्ञानिकों ने सबसे पहले इंसानों के निकाले गए दांतों पर CalBots का टेस्ट किया और हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग से यह साबित किया कि ये नैनोबॉट्स गहराई में जाकर ट्यूब्यूल्स को बंद कर देते हैं. फिर चूहों पर एक व्यवहारिक टेस्ट किया गया. इसमें चूहों को ठंडा और सामान्य पानी दिया गया. जिन चूहों में सेंसिटिविटी थी, उन्होंने ठंडा पानी नहीं पिया. लेकिन जब उन पर CalBots का ट्रीटमेंट किया गया, तो उन्होंने बिना हिचक ठंडा पानी पीना शुरू कर दिया. इसका मतलब यह है कि इलाज सफल रहा और सेंसिटिविटी पूरी तरह खत्म हो गई.

एक बार कराएं ट्रीटमेंट, मिलेगा छुटकारा

नैनोबॉट्स तकनीक दांतों की सेंसिटिविटी से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए वरदान बन सकती है. यह ट्रीटमेंट एक बार करने के बाद लंबे समय तक असर देता है, जिससे बार-बार टूथपेस्ट या दवा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह दांतों के प्राकृतिक ढांचे जैसा स्थायी सील बनाकर दर्द और चुभन को पूरी तरह खत्म कर देता है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले सालों में यह तकनीक डेंटल क्लीनिक का हिस्सा बन जाएगी और लाखों लोगों की जिंदगी आसान बना देगी.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. …और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. … और पढ़ें

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